जैन संकट मोचन विनती Sankat mochan vinti
भक्तामर स्तोत्र
0:00 / 0:00
जैन संकट मोचन विनती Sankat mochan vinti
3 810 902 просмотра · 7 л. назад
भक्तामर स्तोत्र
68,2 тыс. подписчиков
3 810 902 просмотра · 7 л. назад
कविश्री वृन्दावनदास
हे दीनबंधु श्रीपति करुणानिधानजी |
यह मेरी विथा क्यों न हरो बेर क्या लगी ||
मालिक हो दो जहान के जिनराज आपही |
एबो-हुनर हमारा कुछ तुमसे छिपा नहीं ||
बेजान में गुनाह मुझसे बन गया सही |
ककरी के चोर को कटार मारिये नहीं ||
हे दीनबंधु श्रीपति करुणानिधानजी |
यह मेरी विथा क्यों न हरो बेर क्या लगी ||१||