बुद्धअवतरण कालाश्रयी मैक्समूलर महोदय का वेदकाल निर्धारण मत
संस्कृतदीप
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📜 मैक्समूलर का मत एवं वेदांग-आधारित काल-विभाजन
पाश्चात्य विद्वान प्रो० मैक्समूलर ने ऋग्वेद तथा समस्त वैदिक वाङ्मय का काल-निर्धारण संस्कृत साहित्य के चार क्रमिक युगों (Periods) के आधार पर किया है:
छन्द काल (Chandas Period):
इस काल में ऋग्वेद के मन्त्रों की रचना हुई।
मैक्समूलर के अनुसार इसका समय १२०० ईस्वी पूर्व से १००० ईस्वी पूर्व (1200 BC – 1000 BC) तक माना गया है।
मन्त्र काल (Mantra Period):
इस काल में संहिता ग्रन्थों और अन्य मन्त्रों का संकलन हुआ।
इसका समय १००० ईस्वी पूर्व से ८०० ईस्वी पूर्व (1000 BC – 800 BC) तक निर्धारित किया गया है।
ब्राह्मण काल (Brahmana Period):
इस काल में ब्राह्मण ग्रन्थों तथा आरण्यकों की रचना हुई।
इसका समय ८०० ईस्वी पूर्व से ६०० ईस्वी पूर्व (800 BC – 600 BC) तक माना गया है।
सूत्र काल (Sutra Period):
इस अंतिम काल में कल्पसूत्रों एवं वेदांग साहित्य का निर्माण हुआ।
इसका समय ६०० ईस्वी पूर्व से २०० ईस्वी पूर्व (600 BC – 200 BC) तक निर्धारित किया गया है।
📌 मुख्य निष्कर्ष (Summary):
वेदों का रचनाकाल: मैक्समूलर के अनुसार वेदों (ऋग्वेद) की रचना का काल १२०० ईस्वी पूर्व से १००० ईस्वी पूर्व (1200 BC – 1000 BC) है।
पाश्चात्य दृष्टिकोण: पृष्ठ के अंत में दिए गए विवरण के अनुसार, अधिकांश पाश्चात्य (Western) विद्वान वेदों के इस आविर्भाव/अस्तित्व काल को २५०० ईस्वी पूर्व से २००० ईस्वी पूर्व (2500 BC – 2000 BC) के बीच स्वीकार करते हैं।