गया जी की पावन फल्गु नदी से विष्णुपद तक 🙏 पितृपक्ष में दिव्य दर्शन | #गयाजी #पितृपक्ष
Ankul Vashisht
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“राधे राधे 🙏
भारत की पावन धरती पर एक ऐसा तीर्थ है, जहाँ इंसान केवल अपने लिए नहीं… बल्कि अपने उन पितरों के लिए भी आता है, जो इस संसार में हमारे बीच नहीं हैं।
यह है—पावन गया जी।”
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने गयासुर को अपने चरणों से पवित्र किया और इसी कारण यह भूमि गयाक्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हुई। गया जी में भगवान विष्णु के चरणचिह्न वाला विष्णुपद मंदिर आज भी सबसे प्रमुख तीर्थों में माना जाता है। �
Gaya District Government +1
कहा जाता है कि भगवान श्रीराम ने भी अपने पितरों के लिए गया जी में पिंडदान किया था। इसी आस्था के कारण सदियों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर यहाँ आते हैं। �
Gaya District Government
और फिर आती है गया जी की पावन फल्गु नदी…
फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण की परंपरा जुड़ी हुई है। यहाँ की सबसे अद्भुत मान्यताओं में से एक माता सीता से जुड़ी कथा है, जिसके अनुसार फल्गु नदी को श्राप मिला और वह अंतःसलिला के रूप में प्रवाहित होने लगी। �
Gaya District Government +1
यहीं सीता कुंड है, जहाँ मान्यता के अनुसार माता सीता ने राजा दशरथ जी का पिंडदान किया था। पास ही अक्षयवट है, जिसे माता सीता के आशीर्वाद से अक्षय माना जाता है। �
Gaya District Government +1
इसके बाद प्रेतशिला, जहाँ पितरों के तर्पण और पिंडदान की विशेष मान्यता है; और मंगला गौरी, जो गया जी की प्रसिद्ध शक्ति उपासना स्थली है। �
Bihar Tourism +1
“यानी गया जी सिर्फ एक शहर नहीं…
यह आस्था, पितृश्रद्धा और मोक्ष की वह भूमि है,
जहाँ आज भी लोग अपने पूर्वजों को याद करके कहते हैं—
हे प्रभु, हमारे पितरों को अपने चरणों में स्थान देना। 🙏
जय गया जी महाराज… जय श्री विष्णु।”