न्यायदर्शन भूमिका । Nyaydarshan bhumika by Acharya Prashant Sharma
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न्याय दर्शन का परिचय | महर्षि गौतम का तार्किक दर्शन | भारतीय दर्शनशास्त्र
भारतीय दर्शन की महान परंपरा में न्याय दर्शन का एक विशिष्ट स्थान है। महर्षि गौतम द्वारा प्रवर्तित न्याय दर्शन हमें सत्य की खोज करने, तर्क के आधार पर विचार करने तथा सही और गलत ज्ञान के बीच अंतर समझने की दृष्टि प्रदान करता है।
आखिर न्याय दर्शन क्या है? महर्षि गौतम कौन थे? प्रमाण किसे कहते हैं? प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण क्या हैं? सत्य का निर्धारण तर्क और प्रमाण के आधार पर कैसे किया जा सकता है?
इस वीडियो में हम न्याय दर्शन का परिचय सरल भाषा में समझने का प्रयास करेंगे, ताकि भारतीय दर्शन की इस महत्त्वपूर्ण ज्ञान-परंपरा को सामान्य जिज्ञासु से लेकर दर्शन के विद्यार्थियों तक सभी समझ सकें।
हमारा उद्देश्य केवल मान्यताओं को स्वीकार करना नहीं, बल्कि तर्क, प्रमाण और विवेक के आधार पर सत्य को जानने की प्रवृत्ति विकसित करना है।
यदि आप भारतीय दर्शन, न्याय दर्शन, महर्षि गौतम, तर्कशास्त्र, प्रमाण मीमांसा और सत्य की खोज में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए उपयोगी होगा।
वीडियो को अंत तक देखें, अपने विचार कमेंट में साझा करें और भारतीय दर्शन के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए वीडियो को लाइक एवं शेयर करें। चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।
दार्शनिक विचार — तर्क, प्रमाण और विवेक के साथ सत्य की खोज।
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