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गबन/gaban/भाग-25/A novel by munshi premchand@अनंत_प्रेरणा_की_झलक

अनंत_प्रेरणा_की_झलक

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गबन/gaban/भाग-25/A novel by munshi premchand@अनंत_प्रेरणा_की_झलक

74 просмотра · 11 дней назад
अनंत_प्रेरणा_की_झलक
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जोहरा मैं बड़ी मुसीबत में हूं, एक तरफ तो एक आदमी की जान और कई खानदानों की तबाही है, दूसरी तरफ अपनी तबाही है। मैं चाहूं, तो आज इन सबों की जान बचा सकती हूं, मैं अदालत को ऐसा सबूत दे सकती हूं कि फिर मुखबिर की शहादत की कोई हकीकत ही न रह जायेगी, पर मुखबिर को सजा से नहीं बचा सकती।