Перейти к содержимому

Shri Ramchandra Kripalu Bhajman | Official Music Video | Amala Krishna Das

AMALA KRISHNA DAS и ISKCON Dwarka

0:00 / 0:00

Shri Ramchandra Kripalu Bhajman | Official Music Video | Amala Krishna Das

113 227 просмотров · 6 месяцев назад
AMALA KRISHNA DAS и ISKCON Dwarka
113 227 просмотров · 6 месяцев назад
Experience the divine peace and devotion of Shri Ramchandra Kripalu Bhajman, a timeless bhajan composed by the great saint Goswami Tulsidas Ji. Let this bhajan take you on a spiritual journey, calming your mind and connecting you with divine energy. Please spend some time in sharing the video link in your circles. Show your strong support. HARIBOL! Credits: Song - Sri Ramchandra Kripalu Bhajman Lyrics - Goswami Tulsidas Ji Lead Vocals - Amala Krishna Das Mixed & Mastered by - Arvind Talwar Record Label - Bury Worry Music Label/Publisher - Bury Worry DOP: Braj Kishore Das Cast: Piyush, Shubham, Archana Pathani & Vinay Singh Lyrics श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं । आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥ इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं । मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥ मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो । करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो ॥६॥ एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली। तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं । आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥ इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं । मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥ मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो । करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो ॥६॥ एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली। तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥ Watch other Amazing songs by Amala Krishna Das    • Latest Bhajans 2027 | Meditate | Peaceful ...