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Puranay Fasanay पुराने फ़साने ....

Shaher Nama

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Puranay Fasanay पुराने फ़साने ....

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Shaher Nama
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#music #World #india पुराने फ़साने… दिल को सताने आ जाते हैं… जाने कैसी मजबूरी है… हमें रुलाने आ जाते हैं… वो पुराने फ़साने फिर दिल को सताने आ जाते हैं, जाने क्या मजबूरी है—हर बार सुनाने आ जाते हैं। अपने ही शहर में अब हम बेगाने नज़र आते हैं, रस्म-ए-दुनिया है—बस उसे जताने आ जाते हैं। गाँव के आँगन से चमेली के महकते झोंके, आज भी ख़्वाबों में आकर हमें सुलाने आ जाते हैं। वो काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी, कभी ख़्वाबों में बचपन को जगाने आ जाते हैं। जाने कैसी मजबूरी है… हमें रुलाने आ जाते हैं…पुराने फ़साने… दिल को सताने आ जाते हैं… कल तक जो अपने थे, अब नज़रें चुराते हैं, हर मोड़ पर नए इल्ज़ाम लगाने आ जाते हैं। महफ़िल में रहकर भी तन्हा-सा रहता हूँ, कैसे-कैसे लोग दिल को दुखाने आ जाते हैं। जो ज़ख़्म दिए वक़्त ने, भरने भी नहीं देते, हर बार वही लोग उन्हें कुरेदने आ जाते हैं। जाने कैसी मजबूरी है… हमें रुलाने आ जाते हैं… पुराने फ़साने… दिल को सताने आ जाते हैं… वो बरसों से सफ़र में है, राहें बदलता रहता है, लोग हर मोड़ पे मील के पत्थर बदलने आ जाते हैं। इंसाफ़ की चौखट पर इक ख़ामोशी ठहरी है, हम हक़ की बात करें तो समझाने आ जाते हैं। दिल की वीरान गली में तेरे क़दमों की आहट, रात ढलते ही कई दर्द जगाने आ जाते हैं। तन्हाई में जब भी तेरी याद का बादल बरसता है, कुछ अधूरे ख़त आज भी अश्क बहाने आ जाते हैं। जाने कैसी मजबूरी है… हमें रुलाने आ जाते हैं… “नेहाल” दिल ने अभी तक उसे भुलाया ही नहीं, कुछ पुराने ज़ख़्म फिर दिल को रुलाने आ जाते हैं। पुराने फ़साने… दिल को सताने आ जाते हैं… पुराने फ़साने… दिल को सताने आ जाते हैं…