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28. जो नहीं करते अपना काम वे ही करते पर का काम | आत्म-आलोचना | मोक्षमार्ग की कार्यशाला | दोपहर 15.07

Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji

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28. जो नहीं करते अपना काम वे ही करते पर का काम | आत्म-आलोचना | मोक्षमार्ग की कार्यशाला | दोपहर 15.07

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Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji
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मुक्तक – काम - काम बिना कोई नहीं ? कोई पहले तो कोई बाद में , कोई आज तो कोई कल , कोई आगे तो कोई पीछे , कोई अभी तो कोई कभी , अभ्यस्त करे जल्दी तो अनभ्यस्त करे धीरे , कोई इस भव में कोई परभव में ,(भिखारी एवं दानी) कोई हँस-२ करते काम , (पाप पुण्य के उदय में) तो रो-२ करते करते काम , कोई अज्ञान से तो कोई , भेदविज्ञान से होता रहता सदा ही काम | कोई करता काम का काम , कोई करता अटकलों का काम , जो न करते अपना काम , वे ही करते पर का काम , योग्यता प्रमाण सब करते काम , (डॉ एवं कृषक) ज्यादा-कम न करते काम , अपनी परीक्षा को आता काम , प्रवृत्ति में सुधार को होते काम , काम से परास्त होता काम, स्वाधीन होने को करते रहो, सदा सदा तुम अपने काम , अकर्ता कैसे करें परका काम ? निश्चय से भी और व्यवहार से भी , करता रहता सदा अपना ही काम , आज तक तो किया नहीं कभी किसी ने किसी का काम , न कोई करेगा मेरा काम , व्यर्थ विकल्प से होता रहता , सदा , कर्म बंध का ही काम , मुक्त तो रहता मुक्त पर , अनुभव में बंध से होता दुःख का काम , मुक्त के वेदन में न दिखता (संसार का) काम , परकृत माना अपना काम , (देह को) नोकर को माना स्वामी , पामरता के वेदन में भूला निष्काम , सहज ध्रुव तो सहज ही जाना , सहज प्रभुता के वेदन का हुआ काम , भ्रम मिटा भ्रमणा मिटी , प्रगटा आतम राम | अनंतकाल अब होयगा, आराम का काम ||