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Jis Ghari Nahar Pa Kheme Shahe Wala ke Hue #MARSIYA #AMROHA

Zantv

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Jis Ghari Nahar Pa Kheme Shahe Wala ke Hue #MARSIYA #AMROHA

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Bismillah... O’ Allah, grant me the intercession of Hussain (A) on the Day of Appearing (before You) "Jis Ghari Nahar Pa Kheme Shahe Wala ke Hue " Reciter: Syed Mesum Zaidi Marsiya is a poem written to commemorate the martyrdom of Ahl al-Bayt, Imam Hussain and Battle of Karbala. It is usually a poem of mourning. HINDI LYRICS: जिस घड़ी नहर पा खेमे शहे वाला के हुए... और सितमगार मज़ाहिम लबे दरिया के हुए... शाह बरहम ये जफ़ाकारो से फ़रमा के हुए... दुश्मन-ए-जॉन मेरे घर से मुझे बुलवा के हुए... तुम पियो पानी मोहम्मद का नवासा मर जाये... तुम ही मुंसिफ हो जो मेहमा हो वो प्यासा मर जाये.... खेमा इस जॉन से उखड़वाने को हाज़िर हूँ मैं... पर नबी ज़ादा हूँ सय्यद हूँ मुसाफिर हूँ मैं तुरबते अहमदो ज़हरा का मुजाविर हूँ मैं ज़ुल्म जो चाहो करो साबिरो शाकिर हूँ मैं दोगे जो रंज मुझे सब है गवारा मुझको आप मंज़ूर है दरिया से किनारा मुझको मैं ना आता था मदीने से बुलाया तुमने रौज़ए अहमदे मुरसल से छुड़ाया तुमने कोहो सेहरा भी ये दरिया भी दिखाया तुमने हैफ़ है तारीके दुनिया को सताया तुमने रुख इधर का जो किया मैंने तो मुँह मोड़ते हो एक दगा पेशे के वादे पा मुझे छोड़ते हो #1 #MARSIYA #AMROHA © 2020 HUSANARA PRODUCTION. All rights reserved.