जागो मानव – आत्मबोध के 23 निर्गुण भजन | Sant Kabir • Advait • Meditation Music
सीधी चोट
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जागो मानव – आत्मबोध के 23 निर्गुण भजन | Sant Kabir • Advait • Meditation Music
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सीधी चोट
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जागो मानव – आत्मबोध के 23 निर्गुण भजन | Sant Kabir • Advait • Meditation Music
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“जागो मानव” कोई साधारण भजन-संग्रह नहीं,
यह आत्मा को जगाने वाली 23 निर्गुण वाणियों की साधना-यात्रा है।
इन भजनों में
कबीर की चोट है,
अष्टावक्र की निर्भीकता है,
और आत्मबोध की शांति है।
यह संग्रह उन सभी के लिए है जो
माया से ऊब चुके हैं,
दुख से प्रश्न कर चुके हैं,
और सत्य की ओर मुड़ना चाहते हैं।
इन भजनों को सुनते हुए
मन धीरे-धीरे शांत होगा,
अहंकार ढीला पड़ेगा,
और भीतर छुपा “साक्षी” जागने लगेगा।
🎶 यह केवल संगीत नहीं —
यह ध्यान है,
यह स्मरण है,
यह आत्मा की पुकार है।
यदि यह वाणी आपको स्पर्श करे,
तो इसे साझा करें,
ताकि और भी मन जाग सकें।
“जागो मानव — क्योंकि बाहर कुछ नहीं, जो भीतर नहीं है।”
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📜 23 संतवाणी भजन संग्रह – Full Timeline
00:00 – उस राह पे चलें अब फिर (Original)
05:26 – मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे (Claimed – Sharing Revenue)
11:45 – दूर कहीं चेतन पुकारा (Claimed – Sharing Revenue)
16:18 – क्यों खुद की ही निगाह से (Claimed – Sharing Revenue)
22:08 – आत्मा तू शुद्ध है, बुद्ध है (Original)
25:41 – मैं बादल नहीं – मैं आकाश (Original)
29:38 – मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे (Original)
32:03 – हरि भीतर ही प्रकटेंगे अभी (Original)
35:38 – काहे व्याकुल भए रे मनवा (Original)
41:50 – अगर है शौक मिलने का (Original)
45:00 – न बिसरे तू भीतर से (Original)
51:14 – मत पूछो कैसे मैंने रात बिताई (Original)
55:12 – जिन्हें यकीं है वेदों पर (Original)
1:01:17 – जन्म मृत्यु के चक्र में (Original)
1:06:52 – मन की दीवारें ऊँची थी बहुत (Original)
1:11:30 – रात चुप है पर कोई बोल रहा है (Original)
1:15:58 – यही बोध तीखा (Original)
1:20:22 – जप ले हरि का नाम तू (Original)
1:25:05 – अब के हम बिछड़े तो शायद (Original)
1:29:48 – अगर प्यास है सत्य की (Original)
1:32:27 – कभी खुद से पूछ जरा (Original)
1:35:08 – सुनो सजना, ये देह न मेरी (Original)
1:37:51 – वो बाहर नहीं जन्मेंगे (Original)
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