Перейти к содержимому

सहस्रार से पहले क्या होता है? प्रकाश, नाद और ब्रह्म नाड़ी का रहस्य #kundalini #anhatnaad #naadi

Mahadev vaani

0:00 / 0:00

सहस्रार से पहले क्या होता है? प्रकाश, नाद और ब्रह्म नाड़ी का रहस्य #kundalini #anhatnaad #naadi

13 502 просмотра · 2 месяца назад
Mahadev vaani
1,46 тыс. подписчиков
13 502 просмотра · 2 месяца назад
सहस्रार को कुंडलिनी यात्रा का अंतिम द्वार माना जाता है। लेकिन योग शास्त्रों में संकेत मिलता है कि सहस्रार से पहले चेतना एक अत्यंत सूक्ष्म गुप्त मार्ग से गुजरती है। इस मार्ग में साधक को भीतर प्रकाश, अनाहत नाद, शरीर और समय के बदलते अनुभव, सिद्धी का आकर्षण, आनंद का मायाजाल, चित्रिणी नाड़ी और अंत में ब्रह्म नाड़ी जैसे गहरे संकेत मिलते हैं। लेकिन कुंडलिनी तंत्र की दृष्टि में ये अनुभव मंज़िल नहीं हैं। ये केवल द्वार हैं। प्रकाश अंतिम सत्य नहीं है। नाद अंतिम सत्य नहीं है। सिद्धी अंतिम उपलब्धि नहीं है। आनंद भी अंतिम अवस्था नहीं है। सहस्रार का मार्ग अनुभवों को पकड़ने का मार्ग नहीं, बल्कि अनुभवों के पार जाने का मार्ग है। इस वीडियो में हम समझेंगे: सहस्रार से पहले क्या होता है भीतर का प्रकाश क्या संकेत देता है अनाहत नाद का रहस्य क्या है शरीर और समय का अनुभव क्यों बदलता है सिद्धी साधना की परीक्षा क्यों बन सकती है आनंद का मायाजाल क्या है चित्रिणी नाड़ी और ब्रह्म नाड़ी का सूक्ष्म रहस्य और सहस्रार में शिव-शक्ति के परम मौन का अर्थ यह वीडियो केवल आध्यात्मिक ज्ञान और योग शास्त्रों की दृष्टि को समझने के लिए है। इसे किसी साधना, अभ्यास या कुंडलिनी जागरण की instruction की तरह न लें। कुंडलिनी साधना में धैर्य, शुद्धता और योग्य मार्गदर्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सहस्रार से पहले का गुप्त मार्ग प्रकाश से शुरू होता है, नाद से गुजरता है, सिद्धी और आनंद के आकर्षण को पीछे छोड़ता है, और अंत में ब्रह्म नाड़ी के उस मौन में उतरता है जहाँ साधक भी शांत हो जाता है, साधना भी शांत हो जाती है। हर हर महादेव। #सहस्रार #कुंडलिनी #ब्रह्मनाड़ी #अनाहतनाद #प्रकाश #नाद #चित्रिणीनाड़ी #कुंडलिनीजागरण #कुंडलिनीतंत्र #सुषुम्ना #ईडा #पिंगला #शिवशक्ति #सहस्रारचक्र #योगशास्त्र #आध्यात्मिकज्ञान #सनातनधर्म #MahadevVaani #HarHarMahadev #HindiSpiritualVideo #mahadev #shiva #sprituality #mahakal #harharmahadev #shivbhakti #spirituality #consciousness #shivpuran