रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 35 - राधा ने श्री कृष्ण को मथुरा जाने से रोका
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रामानंद सागर कृत श्री कृष्ण भाग 35 - राधा ने श्री कृष्ण को मथुरा जाने से रोका
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Ramanand Sagar's Shree Krishna Episode 35 - Radha stopped Shri Krishna from going to Mathura
मथुरा प्रस्थान करने से पूर्व श्रीकृष्ण राधा को मिलने के लिये यमुना तट पर बुलाते हैं। राधा श्रीकृष्ण को निर्धारित स्थल पर प्रतीक्षा करते मिलती हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैंने मथुरा जाने की पूर्व अनुमति लेने के लिये तुमको बुलाया है। राधा उदास स्वर में कहती हैं कि अनुमति लेने आये हो या प्राण लेने। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि हम दोनों के प्राण तो एक ही है। वह यह भी कहते हैं कि मैं जिस कार्य के लिये धरती पर आया हूँ, वह तो मुझे सम्पन्न करना ही होगा। राधा कहती हैं कि मुझे यह सब कुछ पता है किन्तु यदि तुम चले गये तो मेरी दशा यज्ञकुण्ड की उन लकड़ियों की तरह होगी जो जलकर भस्म हो जाती हैं। राधा श्रीकृष्ण से यह भी कहती हैं कि तुम अपने धर्म संस्थापना के कार्यों में तल्लीन हो जाओगे किन्तु राधा इस अकेलेपन के विशाल शून्य में खोकर किससे अपने मन की बात कहेगी। श्रीकृष्ण राधा को वचन देते हैं कि वह राधा के सपने में आकर उनसे मिलते रहेंगे। राधा कहती हैं कि मुझे नींद आयेगी तभी तो स्वप्न आयेंगे। यदि प्रेमी के विरह में प्रेमिका को सुख की नींद आ जाए तो यह प्रेम का निरादर है। किन्तु श्रीकृष्ण राधा को समझाते हैं कि यदि प्रेमी से मिलन का विश्वास हो तो स्वप्नलोक में जाने से प्रेम का निरादर नहीं होता है। इस पर राधा श्रीकृष्ण को उनकी ही एक बात में फँसाती हैं और कहती हैं कि आप सदा अपने भक्तों और प्रेमियों के वश में हैं और वो जो कहते हैं, आप उसे मानते हैं। श्रीकृष्ण इस पर हामी भरते हैं। राधा उन्हें आज्ञा देती हैं कि तब आप यहीं मेरे पास रहेंगे। इस पर श्रीकृष्ण वृन्दावन छोड़कर नहीं जाने का वचन देते हैं और राधा की आज्ञा का पालन करते हुए मुरली बजाने लगते हैं। तब इन्द्र और ब्रह्मा समेत तमाम देवता वहाँ प्रकट होते हैं और रक्षामि रक्षामि की गुहार लगाते हैं। भगवान ब्रह्मा राधा से कहते हैं कि आप जगत जननी हैं और श्रीकृष्ण की अहलादनी शक्ति हैं और आपको तो पता है कि प्रभु का यह अवतार धरती पर धर्म की संस्थापना और अधर्म का नाश करने के लिये हुआ है। अतएव आप भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा जाने दें। राधा सब समझ जाती हैं। वह श्रीकृष्ण को उलाहना देती हैं कि जब आप हार गये तो आपने अपनी सहायता के लिये देवताओं को बुला लिया। राधा धरती के समस्त प्राणियों के कल्याण के लिये श्रीकृष्ण को मथुरा जाने की अनुमति प्रदान करती हैं और अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें विदा करते हुए दो वचन माँगती हैं। पहला वह अपने हृदय में श्रीकृष्ण का अक्षुष्ण वास माँगती हैं और दूसरे वचन में माँगती हैं कि उनके धरती छोड़ने से पहले श्रीकृष्ण उनसे मिलने एक बार अवश्य आयेंगे। श्रीकृष्ण भी राधा से आँसू की एक बूंद भी न बहाने का वचन माँगते हैं। राधा वचन देती हैं। गोकुल में यह विदाई की बेला है। कृष्ण यशोदा मैया को परेशान करने वाली अपनी शरारतों के लिये उनसे क्षमा माँगते हैं। पिता नन्दबाबा से गले लगकर कृष्ण भावुक होते हैं। श्रीकृष्ण बाल सखाओं से मिलकर स्मृतियाँ ताजा करते हैं। वह गौमाताओं को प्रणाम करते हैं और ग्वालों से गोधन की सेवा का वचन लेते हैं। इसके बाद सभी गोकुलवासियों से विदा लेकर कृष्ण मथुरा को प्रस्थान करते हैं। बलराम उनके साथ हैं। अक्रूर भी उनके साथ हैं। गोपिकाऐं राधा को कृष्ण के गोकुल छोड़कर जाने की सूचना देती हैं। लेकिन राधा तो मानो पत्थर की हो चुकी हैं। राधा की सखी ललिता उन्हें परामर्श देती है कि वह समस्त जनता के सामने आकर बयान करे कि कृष्ण ने किस प्रकार उनसे प्रेम किया और आज उन्हें धोखा देकर जा रहे हैं। किन्तु राधा इस तरह अपने प्रियतम का सार्वजनिक अपमान करने से इनकार कर देती हैं किन्तु ललिता को श्रीकृष्ण से मिलने के लिये भेज देती हैं क्योंकि वह जानती है कि ललिता भी श्रीकृष्ण से मन ही मन प्रेम करती है। ललिता अन्य गोपिकाओं के साथ गोकुल के बाहर मार्ग पर लेटकर अक्रूर के रथ का मार्ग रोक लेती है। वह अक्रूर से कहती हैं कि यदि उन्हें कान्हा को अपने साथ ले जाना है तो रथ हमारे ऊपर चढ़ाकर ले जायें क्योंकि कान्हा के जाने के बाद हमारे शरीर से प्राण तो वैसे भी निकल जाने हैं। तब श्रीकृष्ण रथ से उतर कर गोपिकाओं को समझाते हैं कि उनका सभी गोपियों से प्रेम का रिश्ता है जो उनके गोकुल के जाने के बाद भी अटूट रहेगा किन्तु गोपिकाऐं अपने शरीरों में प्राण रहते हुए कृष्ण को न जाने देने की बात कहती हैं।
Produced - Ramanand Sagar / Subhash Sagar / Pren Sagar
निर्माता - रामानन्द सागर / सुभाष सागर / प्रेम सागर
Directed - Ramanand Sagar / Aanand Sagar / Moti Sagar
निर्देशक - रामानन्द सागर / आनंद सागर / मोती सागर
Chief Asst. Director - Yogee Yogindar
मुख्य सहायक निर्देशक - योगी योगिंदर
Asst. Directors - Rajendra Shukla / Sridhar Jetty / Jyoti Sagar
सहायक निर्देशक - राजेंद्र शुक्ला / सरिधर जेटी / ज्योति सागर
Screenplay & Dialogues - Ramanand Sagar
पटकथा और संवाद - संगीत - रामानन्द सागर
Camera - Avinash Satoskar
कैमरा - अविनाश सतोसकर
Music - Ravindra Jain
संगीत - रविंद्र जैन
Lyrics - Ravindra Jain
गीत - रविंद्र जैन
Playback Singers - Suresh Wadkar / Hemlata / Ravindra Jain / Arvinder Singh / Sushil
पार्श्व गायक - सुरेश वाडकर / हेमलता / रविंद्र जैन / अरविन्दर सिंह / सुशील
Editor - Girish Daada / Moreshwar / R. Mishra / Sahdev
संपादक - गिरीश दादा / मोरेश्वर / आर॰ मिश्रा / सहदेव
Cast / पात्र
Sarvadaman D. Banerjee
सर्वदमन डी. बनर्जी
Swapnil Joshi
स्वप्निल जोशी
Ashok Kumar
अशोक कुमार बालकृष्णन
Deepak Deulkar
दीपक डेओलकर
Sanjeev Sharma
संजीव शर्मा
Pinky Parikh
पिंकी पारिख
Reshma Modi
रेशमा मोदी
Shweta Rastogi
श्वेता रस्तोगी
Paulomi Mukherjee
पौलोमी मुखर्जी
In association with Divo - our YouTube Partner
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