जागती आँखों में ग़म का पहरा रहता है || Jagti ho aakho me Gham ka pehra rehta hai
Akhilesh Shankhdhar
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जागती आँखों में ग़म का पहरा रहता है || Jagti ho aakho me Gham ka pehra rehta hai
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Akhilesh Shankhdhar
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Song Writer
जागती आँखों में ग़म का पहरा रहता है ==2
ज़िंदगी की धूप में ये दर्द गहरा रहता है,
जब तक जागते रहते हैं दर्द कम नहीं होते =2
जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं ===2
दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं ===2
Music
ये जो जागना है
जैसे काँटों पे चलना है =2
हर एक साँस में बस घुट-घुट के जलना है ==2
ख़्वाब की आगोश में ही ज़ख्म ये सब सोते हैं ==2
जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं
दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं ===2
Music
नींद आती है तो लगता है जैसे कोई मरहम लगाता है
कुछ पलों के लिए सुकून मिल जाता है ==2
जब तक जागते रहते हैं दर्द कम नहीं होते
जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं
दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं
====music
जागने का ये सफ़र एक सज़ा लगता है
हर एक लम्हा यहाँ बेवफ़ा सा लगता है ==2
ख़ामोश रात का ये अँधेरा ही साथी है
कहने को तो इस दिल में अब कोई न बाक़ी है.
नींद की पनाह में ही ये दिल सँभलता है ==2
जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं
दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं.===2
Music