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जागती आँखों में ग़म का पहरा रहता है || Jagti ho aakho me Gham ka pehra rehta hai

Akhilesh Shankhdhar

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जागती आँखों में ग़म का पहरा रहता है || Jagti ho aakho me Gham ka pehra rehta hai

41 просмотр · 9 дн. назад
Akhilesh Shankhdhar
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Song Writer जागती आँखों में ग़म का पहरा रहता है ==2 ज़िंदगी की धूप में ये दर्द गहरा रहता है, जब तक जागते रहते हैं दर्द कम नहीं होते =2 जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं ===2 दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं ===2 Music ये जो जागना है जैसे काँटों पे चलना है =2 हर एक साँस में बस घुट-घुट के जलना है ==2 ख़्वाब की आगोश में ही ज़ख्म ये सब सोते हैं ==2 जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं ===2 Music नींद आती है तो लगता है जैसे कोई मरहम लगाता है कुछ पलों के लिए सुकून मिल जाता है ==2 जब तक जागते रहते हैं दर्द कम नहीं होते जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं ====music जागने का ये सफ़र एक सज़ा लगता है हर एक लम्हा यहाँ बेवफ़ा सा लगता है ==2 ख़ामोश रात का ये अँधेरा ही साथी है कहने को तो इस दिल में अब कोई न बाक़ी है. नींद की पनाह में ही ये दिल सँभलता है ==2 जितनी देर के लिए हम सो जाते हैं दर्द मेरे दिल के कम हो जाते हैं.===2 Music