।। श्री दुर्गा गणपति स्तोत्रम।। Shri Durga Ganapati stotram ll #श्री दुर्गा गणपति स्तोत्रम#kuldevvi
Kuldevi
0:00 / 0:00
।। श्री दुर्गा गणपति स्तोत्रम।। Shri Durga Ganapati stotram ll #श्री दुर्गा गणपति स्तोत्रम#kuldevvi
25 просмотров · 2 недели назад
Kuldevi
447 подписчиков
25 просмотров · 2 недели назад
दुर्गागणपतिम् देवं सीहवाहनमंययं दशभुजम् महाशक्तियं सर्वविग्रनिवारकं पार्वती तनयஂ देवं दुर्गारूपसमन्वितन् शत्रूसैन्यप्रणाशायः शूलपाणिनमाम्यः गजाननं महाशक्त्युं दुर्गालक्षण सैयुतं अभयप्रद मित्यूत्तं भक्तानां विग्धनाशकं त्रिनेत्रं चक्रपाणिंच धनुर्बाणधरं विभुं सीहवाहनमारूढं दुर्गागणपतिम् भजे। गदापाशां कुषधरं। माहाशक्ति समन्वितं। वरदं भक्त वर्याणा। सिद्धिदं विग्धनाशकं। यहस्मरेद्गणनाथंतं। दुर्गारूपसमन्वितम् तस्यदुखानि नश्यन्ति रोगशोकविनाशनम् यह पठेस्तोत्रमेत भी श्रद्धावःतिसमन्वितः तस्यविग्णः प्रणशन्ति शत्रवस्युः परामुखः। ताम्भूलफलसयुत्तं पुष्पमाल्यसमन्वितं अरचितः पीतिभावेन धुर्गागणपतिः पृसन्नाः विध्यान्ददाति चोतंमा धनं धान्यं च शोभणं आरोग्यं पुत्र पुत्राश्च भक्ता नामसं प्रदायतें दुर्गागणपतिं देवं ध्यानि नाम ध्यान गोचरं सर्वशत्रु विनाशाय नित्यं ध्यायामि सिद्भिदं पाशांकुषद्धरं नित्यं। शूलचक्रददाधरं। गजानरं महाशक्त्यं, भक्तानुग्रह कारकं। सीहवाहनमारूढं, माहादेव्याहसमन्वितं। भत्तत्राणकरं देवं। दुर्गागणपतिम् भजे सिध्धि बुद्धिपतिम् देवं सर्वसिध्धि प्रदायकं मात्रु दुर्गासमन्वितं विध्नेशं प्रनमाम्यः विग्धरूपाणि सर्वाणि शत्रुसैण्यसमन्वयां दुर्गागणपतिर् नित्यं नाशयत्येव तत्वताः अतस्तोत्रमिदं पुण्यं दुर्गाणपतिं प्रति यह पठेच सश्रध्या नित्यं लभते सर्वसिद्ध्या गनेशः शिरमाव्या दुर्गागण पतिस्तिराः। त्रिनेत्रोनेत्र युगलं पातुसीह वाहनो विभुः। चूलपानिर्ममरुदयं गदापानीर्ममोरसी। चक्रधारी सदाः पातु पादवपाशां कुषो विभुँ। एवं रक्षित सर्वांगों दुर्गा गणपति स्मृताः। सर्फत्र जयमाप्नोति नतस्य पराजयः क्वचे।