Перейти к содержимому

"संसार" जीवन चलने का नाम, सुधा सक्सेना(प़ाक रूह)

सुधा सक्सेना (प़ाक रूह)

0:00 / 0:00

"संसार" जीवन चलने का नाम, सुधा सक्सेना(प़ाक रूह)

35 просмотров · 5 дн. назад
सुधा सक्सेना (प़ाक रूह)
571 подписчик
35 просмотров · 5 дн. назад
मैंने ही हमेशा हिसाब किया है, उसने जब भी दिया, बेहिसाब दिया है। मंज़िल, जब भी नज़रों से दूर हुई है, आँखों को एक नया ख़्वाब दिया है। जुगनुओं के साये में चल रहा था मैं , हर रास्ते को उसने महताब किया है। मोहब्बत फ़िज़ाओं में घुल रही है, ज़रूर हाँथो में उसने ग़ुलाब लिया है। में शर्मिंदा हूँ अपने सवालात पर, वक़्त आने पर हर जवाब दिया है।