हिंदी बोलो तो लोग कम पढ़ा-लिखा समझते हैं? || आचार्य प्रशांत
राष्ट्रधर्म
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हिंदी बोलो तो लोग कम पढ़ा-लिखा समझते हैं? || आचार्य प्रशांत
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वीडियो जानकारी: 25.06.2022, वेदांत महोत्सव, ग्रेटर नोएडा
Title: हिंदी बोलो तो लोग कम पढ़ा-लिखा समझते हैं? || आचार्य प्रशांत
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विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी भारत में हिन्दी की अनदेखी और अंग्रेज़ी की अंधी दौड़ पर चर्चा कर रहे हैं। वे बताते हैं कि आज के समय में लोग अक्सर अंग्रेज़ी को स्टेटस और तरक़्क़ी का प्रतीक मानते हैं, जबकि हिन्दी बोलने में झिझक और शर्म महसूस करते हैं। यह सोच भाषा की कमी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की कमी को दिखाती है। समाज में अंग्रेज़ी को कामयाबी का प्रतीक मान लिया गया है, और हिन्दी को गाली-गलौज और हल्के मनोरंजन तक सीमित कर दिया गया है।
आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि नौकरी और तरक़्क़ी के लिए अंग्रेज़ी ज़रूरी है—यह एक ग़लतफ़हमी है। असली दिक़्क़त अंग्रेज़ी न जानने की नहीं, बल्कि हीन-भावना और दिखावे की मानसिकता है। अंग्रेज़ी सीखना ठीक है, लेकिन अपनी पहचान और आत्म-सम्मान हिन्दी से ही जुड़े हैं। हिन्दी का सम्मान तभी बचेगा जब हम सब अपने जीवन में उसका अधिक प्रयोग करेंगे और उसे आत्म-सम्मान से जोड़कर देखेंगे।
यह वीडियो उन सभी के लिए है जो इस हिन्दी दिवस पर हिन्दी की ताक़त और उपयोगिता को समझना चाहते हैं, और भाषा के नाम पर हो रहे भेदभाव और दुर्व्यवहार को ख़त्म करना चाहते हैं।
🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर:
https://open.spotify.com/show/3f0KFwe...
संगीत: मिलिंद दाते
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