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Zindagi Ek Paheli ‪@MusicofAthor‬

Music of Athor

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Zindagi Ek Paheli ‪@MusicofAthor‬

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Music of Athor
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ज़िंदगी एक पहेली [मुखड़ा] ज़िंदगी… एक पहेली है, कभी धूप, कभी सहेली है, जिसे ढूँढे ये दिल हर घड़ी, वो ख़ुशी भी बड़ी अकेली है… ज़िंदगी… एक पहेली है… [अंतरा 1] कल जो अपना था, आज पराया, वक़्त ने कैसा रंग दिखाया, हँसते चेहरों के पीछे छुपे, कितने ग़मों का है साया। राहों में काँटे, आँखों में सपने, चलते रहे हम अपने ही दम पे, गिरकर संभलना सीखा है हमने, हार को बदला जीत के रंग में। [प्री-कोरस] कभी सवालों की बारिश है, कभी जवाबों का मेला, जितना समझूँ उतना उलझे, ये दिल का खेल अकेला… [मुखड़ा] ज़िंदगी… एक पहेली है, कभी धूप, कभी सहेली है, जिसे ढूँढे ये दिल हर घड़ी, वो ख़ुशी भी बड़ी अकेली है… [अंतरा 2] कुछ लोग मिले तो याद बने, कुछ लोग मिले तो दर्द बने, कुछ रिश्ते पल में टूट गए, कुछ उम्रभर के हमदर्द बने। कल की फ़िक्र में आज न खोना, आँखों में सपनों को कम न होने देना, जो पल मिला है जी भर जी ले, वक़्त को वापस आता नहीं देखा। [ब्रिज] कौन यहाँ है अपना-पराया, किसने किसको सच में पाया? चलते-चलते बस इतना समझा, जीना ही है सबसे बड़ा साया… [फाइनल मुखड़ा] ज़िंदगी… एक पहेली है, हर मोड़ पे नई कहानी है, कल क्या होगा किसने जाना, आज की साँस ही ज़िंदगानी है। ज़िंदगी… एक पहेली है, फिर भी कितनी रंगीली है, ग़म मिले तो मुस्कुरा देना, यही तो इसकी असली ख़ुशी है… ज़िंदगी… एक पहेली है…