सुमिरन बिन गोता खावेगा | Sumiran Bin Gota Khavega | Kabir Bhajan | Kabir Ke Dohe | Kahat Kabir
कहत कबीर
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सुमिरन बिन गोता खावेगा | Sumiran Bin Gota Khavega | Kabir Bhajan | Kabir Ke Dohe | Kahat Kabir
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कहत कबीर
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“सुमिरन बिन गोता खावेगा” – संत कबीर दास जी का प्रेरणादायक भजन।
कबीर साहब कहते हैं कि इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है। अगर जीवन में भीतर के सतनाम का स्मरण नहीं किया, तो आत्मा जन्म-मरण के चक्र और दुखों में फँसी रहती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि असली ईश्वर हर जीव के भीतर है, उसे पहचानो और सुमिरन करो।
🙏 इस भजन को सुनकर आत्मा को शांति और जीवन को दिशा मिलेगी।
"Sumiran Bin Gota Khavega" – A soulful Kabir Das Ji Bhajan that reminds us the true essence of life.
Kabir Sahib teaches us that we come empty-handed in this world and leave empty-handed. Without remembering the truth within (Sumiran), life is wasted in illusion. This bhajan inspires us to turn inward, connect with the divine within, and escape the endless cycle of birth and death.
✨ Listen to this bhajan and feel the wisdom of Sant Kabir Das Ji.
1. सुमिरन बिन गोता खावेगा....
अगर इंसान अपने भीतर बसे परमात्मा का स्मरण नहीं करता, आत्मा की ओर ध्यान नहीं देता, तो वह जीवन-सागर में ऐसे ही डूब जाएगा जैसे कोई तैरना न जानने वाला पानी में डूब जाता है।
मतलब: भीतर के नाम-स्मरण के बिना जीवन का मार्ग भटक जाता है।
2. क्या लेकर तू आया जगत में, क्या लेकर तू जावेगा....
जब तू जन्म लेकर आया था, तेरे पास कुछ भी नहीं था। और जब जाएगा तब भी कुछ साथ नहीं ले जाएगा।
मतलब: बाहरी वस्तुएँ, धन-दौलत, शोहरत सब यहीं रह जाते हैं। आत्मा अकेली ही जाती है।
3. मुट्ठी बांधे आया जगत में, हाथ पसारे जावेगा...
जन्म के समय बच्चा मुट्ठी बाँधकर आता है, मानो सब कुछ पकड़ रखा हो। लेकिन मृत्यु के समय हाथ खुले रहते हैं, खाली।
मतलब: बाहर की चीज़ें पकड़ने की कोशिश व्यर्थ है। भीतर का सुमिरन ही असली सहारा है।
4. बिन सतनाम के नरक पड़ेगा, फिर चौरासी जावेगा...
अगर तूने भीतर के सत् नाम (सच्चे नाम) का स्मरण नहीं किया, तो आत्मा अज्ञान और दुःख में डूबेगी।
मतलब: मूर्तियों और बाहरी दिखावे से मुक्ति नहीं मिलती। केवल अपने भीतर के सत्य से जुड़ना ही जन्म-मरण के चक्र से बचाता है।
5. कहत कबीर सुनो भाई साधो, फिर पाछे पछतावेगा...
कबीर कहते हैं – हे साधु! मेरी बात ध्यान से सुनो। अगर इस जीवन में भीतर बसे परमात्मा को नहीं पहचाना, तो मरने के बाद केवल पछतावा ही बचेगा।
मतलब: जब तक जीवन है, तब तक भीतर झाँककर नाम-स्मरण करो। यही सच्ची साधना है।
✨ सारांश (Summary):
यह भजन हमें सिखाता है कि बाहर भटकने की बजाय भीतर खोजो। धन, दौलत, मूर्ति, दिखावे से कुछ नहीं मिलेगा। जो अपने भीतर बसे परमात्मा का स्मरण करेगा वही जीवन-सागर से पार होगा।
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