PRITHIVIRAJ CHOWAHAN OR MOHAMAD GHORI KE YUDH
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पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी 12वीं शताब्दी के भारत के इतिहास की दो सबसे प्रमुख हस्तियां हैं। इनके बीच हुए युद्धों ने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी थी:
पृथ्वीराज चौहान (पृथ्वीराज तृतीय):
वे अजमेर और दिल्ली के चौहान (चाहमान) वंश के प्रसिद्ध राजपूत राजा थे।
उन्हें उनकी वीरता, युद्ध कौशल और 'शब्दभेदी बाण' (आवाज सुनकर तीर चलाने की कला) विद्या के लिए जाना जाता है।
उन्हें उत्तर भारत में अंतिम शक्तिशाली हिंदू सम्राटों में से एक माना जाता है।
मोहम्मद गोरी (मुइज़ुद्दीन मोहम्मद):
वह अफगानिस्तान के 'ग़ौर' साम्राज्य का शासक था।
उसका मुख्य उद्देश्य भारत में अपने साम्राज्य का विस्तार करना और खजाना लूटना था।
तराइन के युद्ध (तराइन का संग्राम):
तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): इसमें पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को बुरी तरह पराजित किया। गोरी की जान बाल-बाल बची और वह मैदान छोड़कर भाग गया।
तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): गोरी ने एक साल बाद पूरी तैयारी के साथ फिर आक्रमण किया। इस युद्ध में रणनीति की चालाकी और राजपूत राजाओं के आपसी मतभेदों के कारण पृथ्वीराज चौहान की हार हुई।
तराइन के दूसरे युद्ध में मोहम्मद गोरी की जीत के बाद ही भारत में मुस्लिम शासन (दिल्ली सल्तनत) की नींव पड़ी।