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सुंदरा बाई का अहंकार साईं बाबा के सानिध्य में हुआ नष्ट | Best of Saibaba Stories

Shirdi Sai Baba TV

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सुंदरा बाई का अहंकार साईं बाबा के सानिध्य में हुआ नष्ट | Best of Saibaba Stories

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"श्याम सुंदर के जन्मदिन के दिन उसके ससुराल वाले आते हैं। निर्मला की माँ श्याम सुंदर के लिए सोने की चैन लाती है जिसे वो राम लाल की जेब में डाल देती है और उन पर चोरी का इल्ज़ाम लगा देती है। राम लाल को अपने ऊपर लगे इल्ज़ाम से बहुत दुःख पहुँचता है। श्याम सुंदर अपनी सास और निर्मला के साथ राम लाल के घर आता है और उसे वही सोने की चेन देकर चला जाता है। राम लाल को समझ आ जाता है की श्याम सुंदर भी उसे चोर समझता है तो उसे बहुत दुःख होता है । राम लाल को चोरी का इल्ज़ाम से मानसिक तनाव होने लगता है तो वो अपनी जान देने की कोशिश करता है लेकिन साई बाबा मनीषा को समय पर रामलाल के पास पहुँचने के लिए कहते हैं। मनीषा समय पर अपने घर पहुँच जाती है और राम लाल को जान देने से रोक देती है। मनीषा श्याम सुंदर को उसकी चैन वापस लौटा देती है और उसे रामलाल द्वारा उस पर किए हुए उपकार और प्यार के बारे में याद दिलाती है। श्याम सुंदर मनीषा की बात सुन उनसे माफ़ी माँगने जाता है तो निर्मला और निर्मला की माँ उसे वापस से भड़का देती हैं और रोक देती हैं। नानावली को सबक़ सिखाने के लिए कुलकरनी उसे खुजली की दवा मिठाई में मिलकार खिलाने की साज़िश रचता है। कुलकरनी वैद्य नाना वाली को दवा मिला हुआ पेडा खिला देता है और द्वारिकानाथ को कहता है की नाना वाली कुछ ही देर में इस दवा के असर में आ जाएगा। कुलकरनी की दवा से नाना वली को खुजली होने लगती है। नाना वली की खुजली से हालत ख़राब हो जाती है और वो साई के पास जाता है और उनके आसन पर बैठने की ज़िद करता है। साई उसके लिए अपना आसन छोड़ देते हैं और नाना वली उनके आसन पर बैठने से उसकी खुजली शांत हो जाती है।"