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मीना कुमारी की अनसुनी गज़ले पार्ट 3 । Meena Kumari ki Gazale Part 3 #रचनाकार

रचनाकार _Radio

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मीना कुमारी की अनसुनी गज़ले पार्ट 3 । Meena Kumari ki Gazale Part 3 #रचनाकार

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पार्ट 3 दोस्तों, आज हम लेकर आए हैं एक ऐसे रचनाकार को जो हिंदी सिनेमा जगत की एक जानी मानी अभिनेत्री रही है, नाम है मीना कुमारी। एक बेहतरीन अभिनेत्री होने के साथ -साथ मीना कुमारी एक शायरा भी थी। उन्हें मीना कुमारी 'नाज़' के नाम से भी जाना जाता है। उनका वास्तविक नाम महज़बीं बानो था। मीना कुमारी की रचनाओं की कुछ पंक्तियां- चांद तन्हा है आसमां तन्हा दिल मिला है कहां कहां तन्हा बुझ गई आस, छुप गया तारा थरथराता रहा धुआं तन्हा ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं जिस्म तन्हा है और जां तन्हा हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी दोनों चलते रहें कहां तन्हा जलती बुझती सी रौशनी के पर, सिमटा सिमटा सा एक मकां तन्हा राह देखा करेगा सदियों तक छोड़ जाएंगे ये जहां तन्हा मीना कुमारी की मां एक मशहूर नृत्यांगना और अदाकारा थीं और उनका संबंध टैगोर ख़ानदान से था। घर के माहौल की वजह से अदाकारी मीना कुमारी को विरासत में मिली। इसी अदाकारी को उन्होंने अपने परिवार की तंगी दूर करने का ज़रिया बनाया और इसमें वह कामयाबी भी रहीं। आर्थिक तंगी से तो मीना कुमारी का परिवार उबर गया, लेकिन वह ख़ुद ज़िंदगी भर दुखों की गिरफ़्त से नहीं निकल पाईं। अपनी ज़िंदगी में वह जितनी कांटों और दर्द भरी राहों से गुज़रीं उसे ही उन्होंने शायरी में ढाल दिया - आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता जब ज़ुल्फ़ की कालिख़ में घुल जाए कोई राही बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता हंस हंस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टुकड़े हर शख़्स की क़िस्मत में ईनाम नहीं होता| दोस्तों, आगे आने वाली पॉडकास्ट में मीना कुमारी की अन्य रचनाओं को भी लाने का हमारा प्रयास है। हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले। #meenakumari #meenakumarikikavita #meenakumarinaaz #hindigazal #hindishayari #hindikavita