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हमारा स्वाभिमान ,,बेटी,,

Hansa Shrivastava

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हमारा स्वाभिमान ,,बेटी,,

3 просмотра · 4 дня назад
Hansa Shrivastava
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#विषय बेटी , #विधा ,छंद मुक्त स्वरचित रचना #संदर्भ जो हमारा स्वाभिमान है । जो जन्म लेते ही दो कुल की नींव रख देती है । जिसे हम नाथों से पालते हैं , आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। परंतु ,इसके बाद हर वर्ग सम्प्रदाय धर्म जाति ,के माता पिता के विशाल हृदय में एक भाव ,उसका विवाह ,,बसा होता है वह चाहता हो उसकी बेटी का विवाह अच्छे कुल में हो। यह भारतीय परम्परा की आत्मा है ,पवित्र पावन बंधन है , जो युग युग से चला आ रहा है और रहेगा ,यह भारतीयता की पहचान है । इसी भाव को रचना में उतारा है । हंसा श्रीवास्तव हंसा