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पचपन खम्भे लाल दीवारें (भाग 2) - By उषा प्रियंवदा

फसाने-अजायब

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पचपन खम्भे लाल दीवारें (भाग 2) - By उषा प्रियंवदा

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पचपन खंभे लाल दीवारें ऊषा प्रियंवदा का पहला उपन्यास है, जिसमें एक भारतीय नारी की सामाजिक-आर्थिक विवशताओं से जन्मी मानसिक यंत्रणा का बड़ा ही मार्मिक चित्रण हुआ है। छात्रावास के पचपन खंभे और लाल दीवारें उन परिस्थितियों के प्रतीक हैं जिनमें रहकर सुषमा को ऊब तथा घुटन का तीखा एहसास होता है, लेकिन फिर भी वह उससे मुक्त नहीं हो पाती, शायद होना नहीं चाहती, उन परिस्थितियों के बीच जीना ही उसकी नियति है। आधुनिक जीवन की यह एक बड़ी विडंबना है कि जो हम नहीं चाहते वही करने को विवश हैं। लेखिका ने इस स्थिति को बड़े ही कलात्मक ढंग से प्रस्तुत उपन्यास में चित्रित किया है। #indian #sahitya #hindi #kahanisuno #kahani #literature #Usha #priyamvada #feminism #women #college #love #story