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पत्थर पूजे हरि मिले. तो मैं पूजूं पहाड़ रे | दिल छू लेने वाला कबीर भजन | Kabir Bhakti Song |

KabirDivineOfficial

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पत्थर पूजे हरि मिले. तो मैं पूजूं पहाड़ रे | दिल छू लेने वाला कबीर भजन | Kabir Bhakti Song |

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पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़ रे | दिल छू लेने वाला कबीर भजन | Kabir Bhakti Song | Kabir Amritwani Description पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़ रे संत कबीर दास जी की अमर वाणी पर आधारित एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मा को जागृत करने वाला Kabir Bhakti Song है। यह भजन हमें बाहरी आडंबर, कर्मकांड और दिखावे से हटकर अपने भीतर बसे परमात्मा की खोज करने की प्रेरणा देता है। यदि यह भजन आपके हृदय को स्पर्श करे तो कृपया वीडियो को Like 👍, Share 📤 और Channel Subscribe 🔔 अवश्य करें तथा कमेंट में "सतनाम साहेब" लिखकर अपना प्रेम और आशीर्वाद दें। 🙏 जय सतगुरु कबीर साहेब 🙏 सतनाम साहेब 🔖 Hashtags #KabirBhajan #KabirAmritwani #KabirVani #KabirBhakti #KabirSong #SantKabir #Satnam #Satguru #NirgunBhajan #BhaktiSong #DevotionalSongs #HindiBhajan #KabirDohe #Bhajan2026 #SpiritualMusic #MeditationMusic #PeacefulBhajan #KabirStatus #KabirKeDohe #Bhakti --- Full Song Lyrics (Intro) जब मन सत्य की खोज में निकलता है, तब उसे बाहरी दिखावे नहीं, बल्कि भीतर का प्रकाश मार्ग दिखाता है। संत कबीर दास जी ने अपने दोहों और वाणी के माध्यम से यही संदेश दिया कि परमात्मा पत्थरों, आडंबरों और बाहरी कर्मकांडों में नहीं, बल्कि निर्मल हृदय, सच्चे प्रेम और सतगुरु के ज्ञान में मिलते हैं। यह भजन उसी अमर संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। (Verse 1) पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़ रे, मन के भीतर झांके बिना, कैसे मिले मुरार रे। मंदिर मस्जिद ढूंढ रहा है, अपना ही भगवान, अपने अंदर बैठा मालिक, वही सच्चा भगवान। नाम बिना सब सूना-सूना, जग का सारा मोल, सतगुरु की वाणी से खुलता, जीवन का हर पोल। झूठे रिश्ते, झूठी माया, झूठा सारा संसार, सच्चा केवल नाम है प्यारे, वही करे उद्धार। (Chorus) पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़ रे, दिल में प्रेम जगाओ भाई, वहीं बसे करतार रे। सतनाम की ज्योति जलाओ, मिट जाएगा अंधियार, कबीर कहें भीतर देखो, वहीं मिलेगा सरकार। (Verse 2) माला फेरे हाथ में, मन फिरता बाजार, मन का फेर न बदले जब तक, कैसे हो उद्धार। ऊँचे वस्त्र पहनने से, कोई संत न होय, जिसके भीतर प्रेम बसै, वही प्रभु को पाय। अहंकार की दीवार गिराओ, प्रेम का दीप जलाओ, लोभ मोह के बंधन छोड़ो, सच्चे पथ पर आओ। दया, धर्म और सत्य अपनाओ, जीवन होगा धन्य, सतगुरु की शरण जो आए, उसका हो कल्याण। (Bridge) ना काशी में, ना काबा में, ना जंगल की राह, सच्चे मन की गहराई में, मिलता प्रभु की चाह। जिसने अपने मन को जीता, वही हुआ बलवान, नाम की डोरी जिसने थामी, वही हुआ महान। (Verse 3) क्षणभंगुर यह जीवन सारा, पल में छूटे साथ, खाली हाथ सभी को जाना, यही जगत की बात। धन दौलत सब यहीं रहेंगे, साथ चलेगा नाम, सतगुरु की कृपा से मिलता, अमर शांति का धाम। भेदभाव सब दूर भगाओ, प्रेम की गंगा बहाओ, हर प्राणी में प्रभु को देखो, जीवन सफल बनाओ। नफरत छोड़ो, प्रेम अपनाओ, यही संतों का सार, कबीर वाणी अमृत जैसी, करती भव से पार। (Chorus) पत्थर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूं पहाड़ रे, दिल में प्रेम जगाओ भाई, वहीं बसे करतार रे। सतनाम की ज्योति जलाओ, मिट जाएगा अंधियार, कबीर कहें भीतर देखो, वहीं मिलेगा सरकार। (Outro) कबीर की यह अमृत वाणी, जग को देती ज्ञान, भीतर बैठा परमात्मा ही, जीवन का भगवान। पत्थर में मत खोजो उसको, अपने मन में झांको, सतगुरु के चरणों में रहकर, सच्चे प्रभु को पाओ। ॥ सतनाम साहेब ॥