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🚨 लेनाकापवीर: HIV रोकथाम की बड़ी खोज, लेकिन भारत में लोगों की पहुँच से बाहर

Working Group on Access to Medicines - India

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🚨 लेनाकापवीर: HIV रोकथाम की बड़ी खोज, लेकिन भारत में लोगों की पहुँच से बाहर

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लेनाकापवीर: HIV की रोकथाम में उपयोगी, और मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट HIV के इलाज में भी मददगार—और साल में सिर्फ 2 बार लगना पड़ता है। लेकिन अमेरिकी कंपनी Gilead ने लेनाकापवीर कीमत इतनी ज़्यादा रखी कि सालाना खर्च 25 लाख रुपये+ बताया गया। बाद में “वॉलंटरी लाइसेंस” साइन हुआ जिसमें 4 भारतीय जेनरिक कंपनियाँ भी शामिल हैं। कीमत गिर के करीब 3600 रुपये आ गई। लेकिन फ़िर भी भारत में ये इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है क्योंकि Gilead ने इसे भारत में रजिस्टर ही नहीं किया। बिना रजिस्ट्रेशन के लेनाकापवीर न बन सकती है, न बिक सकती है। ऊपर से, सरकार लोकल Phase III ट्रायल की शर्त हटाने को तैयार नहीं जिससे उपलब्धता में और देर हो सकती है। 📌 इसके मद्देनजर, HIV कम्युनिटी की मांगें साफ हैं: भारत में तुरंत रजिस्ट्रेशन, लोकल Phase III ट्रायल की अनिवार्यता हटे, एवरग्रीनिंग पेटेंट आवेदन खारिज हों, और सस्ती/पर्याप्त जेनरिक सुनिश्चित हो। और सबसे ज़रूरी: “कॉरपोरेट गेटकीपिंग” तय न करे कि कौन HIV से बचेगा, कौन नहीं ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा वीडियो देखें: --- प्रोडक्शन: ज्योत्सना सिंह, और के. एम. गोपाकुमार स्क्रिप्ट: ज्योत्सना सिंह एडिटिंग: इतिका सिंह --- #lenacapavir #hivprevention #accesstomedicines #PatentJustice #healthforall