जब भूख और उपेक्षा ने तोड़ दी सारी मर्यादाएँ...|बूढ़ी काकी - प्रेमचंद |Classic Hindi Audio Story
Kahaniya Dil Se - Priti Jauhari
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जब भूख और उपेक्षा ने तोड़ दी सारी मर्यादाएँ...|बूढ़ी काकी - प्रेमचंद |Classic Hindi Audio Story
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Kahaniya Dil Se - Priti Jauhari
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कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की अमर कहानी 'बूढ़ी काकी' मानवीय संवेदना, बुढ़ापे की बेबसी और पारिवारिक उपेक्षा को दर्शाने वाली एक हृदयस्पर्शी रचना है। जब अपनों की ही चौखट पर भूख और लाचारी से आँखें सिसक उठती हैं, तो रूह काँप जाती है। यह कहानी हमें बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान और प्रेम की याद दिलाती है।
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✍️ लेखक परिचय:
मुंशी प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 – 8 अक्टूबर 1936) आधुनिक हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे महान उपन्यासकार और कहानीकारों में गिने जाते हैं। उन्हें 'उपन्यास सम्राट' और 'कथा सम्राट' कहा जाता है। उन्होंने समाज के यथार्थ, किसानों, गरीबों और मानवीय संवेदनाओं को अपनी लेखनी का मुख्य आधार बनाया। 'गोदान', 'गबन', 'कफ़न', 'ईदगाह' और 'बूढ़ी काकी' उनकी कालजयी रचनाओं में शामिल हैं।
📖 कहानी: बूढ़ी काकी (Budhi Kaki)
✍️ लेखक: मुंशी प्रेमचंद
🎙️ स्वर: प्रीति जौहरी
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