नैमिषारण्य दर्शन इतिहास सहित||तीर्थो का तीर्थ चक्रतीर्थ||कैसे पहुंचे Latest जानकारी? #naimisharanya
JaiSriRamMahima
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नैमिषारण्य दर्शन इतिहास सहित||तीर्थो का तीर्थ चक्रतीर्थ||कैसे पहुंचे Latest जानकारी? #naimisharanya
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नैमिषारण्य दर्शन इतिहास सहित || तीर्थो का तीर्थ चक्रतीर्थ || कैसे पहुंचे latest जानकारी 2025? #naimisharanya
उत्तर प्रदेश के राजधानी लखनऊ से लगभग 90 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध तीर्थ नैमिषारण्य है। यह सतयुग में 88 हजार ऋषियों की तपोभूमि रही है।
नैमिषारण्य में गोस्वामी तुलसीदासकृत श्रीराम चरित मानस की एक चौपाई लिखी मिल जाएगी, ‘तीरथवर नैमिष विख्याता, अति पुनीत साधक सिद्धिदाता।’।
नैमिष' की व्युत्पत्ति 'निमिष' शब्द से बताई जाती है, क्योंकि गौरमुख ने एक निमिष में असुरों की सेना का संहार किया था (कर्निघम, आ.स.रि. भाग १)। एक अन्य अनुश्रुति के अनुसार इस स्थान पर अधिक मात्रा में पाए जानेवाले फल निमिष के कारण इसका नाम नैमिष पड़ा। व्युत्पत्ति के विषय में तीसरा मत है कि असुरों के दलन के अवसर पर विष्णु के चक्र की निमि नैमिष में गिरी थी (मत्स्य २२/१२/१४, वायुपुराण १/१५, ब्रह्माण्ड पुराण १/२/८)। किंतु दूसरे आख्यान के अनुसार जब देवताओं का दल महादेव के नेतृत्व में ब्रह्मा के पास असुरों के आतंक से पीड़ित होकर पहुँचा, तो ब्रह्मा ने अपना चक्र छोड़ा और उन्हें वह स्थान तपस्या के लिए निर्देशित किया जहाँ चक्र गिरे। नैमिष में चक्र गिरा अत: वह स्थल आज भी चक्रतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है
चक्रतीर्थ नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में गोमती नदी के बाएं तट पर स्थित एक पवित्र तीर्थस्थल है, जिसे 88 हजार ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है. यहाँ स्थित चक्रतीर्थ नामक कुंड पौराणिक कथाओं से जुड़ा है, इसमें स्नान करने से मन, शरीर और आत्मा पवित्र होती है. यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यहाँ की यात्रा चार धाम यात्रा के समान मानी जाती है.
महर्षि शौनक के मन में दीर्घकाल तक ज्ञान सत्र करने की इच्छा थी। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उन्हें एक चक्र दिया और कहा- `इसे चलाते हुए चले जाओ। जहां इस चक्र की `नेमि' (बाहरी परिधि) गिर जाय, उसी स्थल को पवित्र समझकर वहीं आश्रम बनाकर ज्ञान सत्र करो।' शौनकजी के साथ अदृसी सहस्र ऋषि थे। वे सब लोग उस चक्र को चलाते हुए भारत में घूमने लगे। गोमती नदी के किनारे एक तपोवन में चक्र की नेमि गिर गयी और वही वह चक्र भूमि में प्रवेश कर गया। चक्र की नेमि गिरने से वह तीर्थ 'नैमिष' कहा गया। जहां चक्र भूमि में प्रवेश कर गया, वह स्थान चक्रतीर्थ कहा जाता है। यह तीर्थ गोमती नदी के वाम तट पर है और ५१ पितृस्थानों में से एक स्थान माना जाता है। यहां सोमवती अमावस्या को मेला लगता है।
पौराणिक महत्व
माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने 88,000 ऋषियों के लिए एक पवित्र भूमि की तलाश करते हुए अपना एक चक्र पृथ्वी पर छोड़ा था.
जहाँ चक्र की मध्य भाग या नेमि गिरी, वह स्थान पवित्र भूमि बना, जिसे नैमिषारण्य कहा गया और वह चक्रतीर्थ सरोवर के रूप में आज भी विद्यमान है.
कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ भी किया था.
धार्मिक महत्व
चक्रतीर्थ में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
यह स्थान कलियुग के प्रभाव से मुक्त माना जाता है और यहां की यात्रा करने से चार धाम की यात्रा पूरी होती है.
पुराणों, महाभारत और रामायण जैसे कई प्राचीन धर्मग्रंथों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है.
स्थान
चक्रतीर्थ नैमिषारण्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 90 किलोमीटर
यहां बसों और निजी वाहनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है. दो सड़क मार्ग है एक वाया सिधौली और दूसरा वाया संडीला /मॉल
लखनऊ के कैसरबाग बस अड्डे से लगभग प्रत्येक एक डेढ़ घंटे में आसानी से बस जाती है , सीतापुर मार्ग पर स्थिति सिधौली पहुंचकर वहां से टैम्पो/ taxi द्वारा भी पहुंचा जा सकता है
लखनऊ के घंटाघर चौक से 2 AC बस सुविधा है जो प्रातः 9 और 10 बजे है वापसी उसी दिन 2 बजे और 3 बजे है कभी कभी बस के समय में परिवर्तन भी हो सकता है इसलिए सिटी ट्रांसपोर्ट बस सर्विस दुबग्गा लखनऊ के हेल्प लाइन no 1800 180 5014 से सही समय की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है
मुख्य मंदिर और दर्शनीय स्थल
यहां स्थित चक्रतीर्थ सरोवर मुख्य आकर्षण है, जिसके चारों ओर जल भरा रहता है.
यहां अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जिनमें भूतनाथ महादेव मंदिर, ललिता देवी मंदिर और रुद्रवर्त कुंड के निकट का मंदिर शामिल हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि JaiSrirammahima किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.