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SMRs (Small Modular Reactors): विज्ञान की निरंतरता, रोजगार और जमीनी हकीकत ⚛️​

Lalit Kumar Gupta

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SMRs (Small Modular Reactors): विज्ञान की निरंतरता, रोजगार और जमीनी हकीकत ⚛️​

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Lalit Kumar Gupta
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​SMRs (Small Modular Reactors): विज्ञान की निरंतरता, रोजगार और जमीनी हकीकत ⚛️ ​आजकल मीडिया और इंटरनेट पर SMR को लेकर एक गजब का उत्साह है। लेकिन इस उत्साह के साथ-साथ कई भ्रांतियां भी फैल रही हैं। परमाणु उद्योग (Nuclear Industry) में लगभग 37 वर्षों के व्यावहारिक अनुभव और रिएक्टर ऑपरेशन्स को करीब से जीने के नाते, मैं आपके सामने इसकी वैज्ञानिक और व्यावहारिक सच्चाई रखना चाहता हूँ: ​🔹 भ्रम 1: SMR का बुनियादी विज्ञान बिल्कुल नया है। • सच्चाई: प्रकृति के नियम नहीं बदलते। आज भी ऊर्जा पैदा करने का मूल सिद्धांत फिशन (Fission) और ईंधन यूरेनियम ही है। ट्रांसपोर्ट और डिफ्यूजन इक्वेशंस (Transport and Diffusion Equations) आज भी वही हैं। बदला है तो सिर्फ हमारा अनुभव और आधुनिक कंप्यूटर कोड्स की बदौलत हमारी गणना की सटीकता (Accuracy)। ​🔹 भ्रम 2: ये बिल्कुल नए और अनोखे डिज़ाइन हैं। • सच्चाई: आज दुनिया में जिन अधिकांश SMR डिज़ाइनों पर काम हो रहा है, वे हमारे पुराने और परखे हुए रिएक्टर्स पर ही आधारित हैं। इनमें से ज्यादातर लाइट वॉटर रिएक्टर्स (LWR) हैं, जिन्हें प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर (PWR) या बॉइलिंग वॉटर रिएक्टर (BWR) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। ​🔹 भ्रम 3: ये "प्लग एंड प्ले" हैं और इनमें रीफ्यूलिंग की जरूरत नहीं होती। • सच्चाई: SMR कोई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं, बल्कि एक उच्च-तकनीकी औद्योगिक प्लांट है। इनमें भी समय आने पर रीफ्यूलिंग की आवश्यकता होगी। साथ ही, समय-समय पर मेंटेनेंस, कल्पूर्जों की तकनीकी जांच (Inspections) और एजिंग मैनेजमेंट (Ageing Management) अनिवार्य रूप से करना ही होगा। ​🔹 भ्रम 4: छोटा आकार किसी जादुई तकनीक का नतीजा है। • सच्चाई: यहाँ "छोटे" का संबंध उसकी बिजली उत्पादन क्षमता (Power Output) से है। जब रिएक्टर की पावर क्षमता कम होती है, तो रिएक्टर का कोर (Core) अपने आप छोटा हो जाता है। कोर छोटा होने से उससे जुड़े सभी कंपोनेंट्स जैसे प्रेशर वेसल, स्टीम जनरेटर, टरबाइन और कंडेंसर का साइज भी स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। यह शुद्ध इंजीनियरिंग है। ​🔹 भ्रम 5: ऑटोमेशन के बाद मैनपावर की जरूरत खत्म हो जाएगी और युवाओं की नौकरियां चली जाएंगी। • सच्चाई: यह डर बिल्कुल बेबुनियाद है। ऑटोमेशन सुरक्षा को मजबूत करता है, लेकिन वह कभी भी मानव मस्तिष्क का विकल्प नहीं बन सकता। किसी भी क्रिटिकल परिस्थिति में अंतिम निर्णय हमेशा एक क्वालिफाइड ऑपरेटर का ही रहेगा। बल्कि, जब देश भर में कई SMRs लगेंगे, तो उनकी कमिशनिंग, रेगुलेटरी ओवरसाइट, इंस्पेक्शंस और मेंटेनेंस के लिए भारी संख्या में कुशल मैनपावर की जरूरत होगी। नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि नए रूप में सामने आएंगी। ​💡 निष्कर्ष: SMR कोई जादुई चमत्कार या डराने वाली तकनीक नहीं है, बल्कि हमारे दशकों पुराने, सुरक्षित और परखे हुए परमाणु विज्ञान का एक व्यावहारिक, लचीला और आधुनिक विस्तार है। यह भविष्य में कार्बन-मुक्त (Net-Zero) और स्वच्छ ऊर्जा देने के लिए हमारा एक बहुत बड़ा संबल बनने जा रही है। ​#NuclearEnergy #SMRs #ReactorPhysics #AtomicIndia #LKSamvaad #cleanenergy