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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 21 से 30 ज्ञानकर्मसंन्यास योग l यज्ञ,इन्द्रिय संयम,आहार और प्राणायाम

Lalit Motivational Story

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 21 से 30 ज्ञानकर्मसंन्यास योग l यज्ञ,इन्द्रिय संयम,आहार और प्राणायाम

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 श्लोक 21 से 30 ज्ञानकर्मसंन्यास योग l यज्ञ,इन्द्रिय संयम,आहार और प्राणायाम श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 — ज्ञानकर्मसंन्यास योग के श्लोक 21 से 30 में भगवान श्रीकृष्ण कर्म, ज्ञान, इन्द्रिय-संयम, स्वाध्याय, प्राणायाम और आहार-संयम जैसे महत्वपूर्ण विषयों की गहरी शिक्षा देते हैं। इस वीडियो में हम सरल हिंदी में समझेंगे कि मनुष्य अपने कर्मों को किस प्रकार आध्यात्मिक साधना बना सकता है और इन्द्रियों पर नियंत्रण करके अपने जीवन को सही दिशा में कैसे ले जा सकता है। इस भाग में विशेष रूप से यज्ञ के विभिन्न रूप, इन्द्रिय संयम, स्वाध्याय एवं ज्ञान, प्राणायाम और आहार-संयम जैसे विषयों को समझाया गया है। भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देना नहीं है, बल्कि अपने कर्म, इन्द्रियों, सांसों, ज्ञान और जीवनशैली को भी सही उद्देश्य के लिए समर्पित करना एक प्रकार का यज्ञ है। 🙏 यदि आपको श्रीमद्भगवद्गीता, भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश, कृष्ण ज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन बदलने वाली सीख पसंद है, तो वीडियो को Like करें, अपने परिवार और मित्रों के साथ Share करें और चैनल को Subscribe जरूर करें। ॥ श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥ 🙏 #श्रीमद्भगवद्गीता #भगवद्गीता #गीता #अध्याय4 #ज्ञानकर्मसंन्यासयोग #श्रीकृष्ण #कृष्णज्ञान #गीता_ज्ञान #सनातनधर्म #आध्यात्मिकज्ञान #Krishna #BhagavadGita