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बरसे मेघ, चले पुरवैया,ओ सुन ननदी के भईया।सावन में आजा मोरे राजा,भीजे चुनरिया, भीजे अँगरैया।

Bharat AI Dhun

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बरसे मेघ, चले पुरवैया,ओ सुन ननदी के भईया।सावन में आजा मोरे राजा,भीजे चुनरिया, भीजे अँगरैया।

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बरसे मेघ, चले पुरवैया, ओ सुन ननदी के भइया। सावन में आजा मोरे राजा, भीजे चुनरिया, भीजे अँगरैया। बरसे मेघ, चले पुरवैया, ओ सुन ननदी के भइया। सावन में आजा मोरे राजा, तरसे तोसे नैना, जिया घबरैया। कजरारी बदरिया घिर-घिर आए, आँगन में मोर पपीहा गाए। झूला पड़ा है नीम की डाली, तेरे बिन लागे दुनिया खाली। बूँद-बूँद तन को सहलाए, मनवा तोरे गीत सुनाए। चूड़ी छनके, पायल बाजे, तेरे बिना काहे मन ना राजे। बरसे मेघ, चले पुरवैया, ओ सुन ननदी के भइया। सावन में आजा मोरे राजा, भीजे चुनरिया, भीजे अँगरैया। नदिया किनारे कदंब की छैयाँ, याद आवें संग बिताई बतियाँ। तू जो हँसे तो सावन सजे, तू जो रूठे तो मनवा तरसे। महकी-महकी माटी बोले, मन के पट अब कौन ये खोले। तेरी राह निहारूँ सजना, द्वारे बैठी बाट जोहूँ सजना। बरसे मेघ, चले पुरवैया, ओ सुन ननदी के भइया। सावन में आजा मोरे राजा, तरसे तोसे नैना, जिया घबरैया। सासू पूछें, “काहे उदासी?” कैसे बताऊँ मन की प्यासी। ननदी छेड़े, “भइया कब आएँ?” मैं शरमाऊँ, कुछ ना बताऊँ। अँखियन में तेरी तस्वीर बसी, साँसों में तेरी खुशबू बसी। आजा पिया अब देर न करना, सावन बीते, ऐसा न करना। बरसे मेघ, चले पुरवैया, ओ सुन ननदी के भइया। सावन में आजा मोरे राजा, भीजे चुनरिया, भीजे अँगरैया। झूला झूलूँ तेरे संग राजा, गाऊँ सावन की मीठी बतियाँ। बरसे मेघ, चले पुरवैया, आजा रे मोरे ननदी के भइया... सावन में आजा मोरे राजा।