विंध्याचल वाली माई असल में कृष्ण के बहिन निकलली
Dhyan Marga - भोजपुरी विचार
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विंध्याचल वाली माई असल में कृष्ण के बहिन निकलली
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कंस के मुट्ठी से छूट के विंध्याचल वाली माई कहाँ गइली, आ कृष्ण के ओह बहिन के रहस्य का बा? (Vindhyachal wali Mai katha)
21 दिन के Brahma Muhurta साधना गाइड https://dhyanmarga.com/neosutra/?utm_...
विंध्याचल वाली माई के ई कथा श्रीमद्भागवत आ देवी पाठ के ओह प्रसंग पर आधारित बा, जेह में कंस के बहिन देवकी आ वसुदेव के बियाह से शुरू होके, मथुरा के कारागार में जनमल आठवीं संतान के रूप में योगमाया के अवतार तक के पूरा घटना समेटल गइल बा। एह वीडियो में रउआ जानब कि कंस काहे आपन बहिन देवकी आ वसुदेव के बेड़ी में बाँध दिहलस, छव मासूम बालकन के भाग्य का भइल, सातवाँ गर्भ कइसे रोहिणी के कोख में बलराम बन के पहुँचल, आ आठवीं बेर यशोदा के घर जनमल बेटी के साथ कंस के आखिरी सामना कइसे भइल। विंध्याचल वाली माई, विंध्यवासिनी देवी, कंस की बहन आ देवकी के आठवीं संतान जइसन खोज खातिर ई कथा एगो सम्पूर्ण जवाब देला।
ई वीडियो उन सब दर्शकन खातिर बा जे देवी-देवता के कथा, श्रीकृष्ण जन्म कथा, आ भारतीय लोक आस्था में रूचि राखेलें, खासकर पूर्वांचल, भोजपुरी भाषी इलाका आ बिहार-मिर्जापुर के श्रद्धालु जे विंध्याचल वाली माई के पूजा करेलें। नवरात्र में गंगा स्नान करके चुनरी-नारियल चढ़ावे वाला भक्त, घर में लइकन के मुंडन के मन्नत राखे वाला महतारी, आ अंतस के खोज में रूचि राखे वाला हर साधक खातिर ई कथा मन के दर्पण जइसन बा। ध्यान मार्गा परिवार के अंतस के खोज चैनल पर एह गाथा के माध्यम से भीतर के डर, त्याग आ मौन बलिदान के समझे के कोशिश कइल गइल बा।
एह कथा के केंद्र में बा कंस के भीतर बइठल डर, जेह से ऊ देवकी-वसुदेव के छव संतान के पखान पर पटक दिहलस, आ सातवाँ गर्भ योगमाया के माया से गोकुल पहुँच गइल, जहाँ रोहिणी के कोख से बलराम जनमलें। आठवीं घड़ी में भगवान खुद देवकी के कोख से प्रकट भइलें, आ ओही पल यशोदा के कोख से एगो तेजस्वी कन्या जनमली। कंस जब ओह नवजात बेटी के पखान पर पटके चाहलस, त ऊ उनकर मुट्ठी से फिसल के अकास में अष्टभुजा महाशक्ति के रूप में प्रकट भइली, आठो हाथ में शस्त्र धारण कइले, आ कंस के चेतावनी देके अनंत ज्योति में अंतर्धान हो गइली। श्रीमद्भागवत अनुसार ई देवी धरती पर दुर्गा, भद्रकाली, विजया, वैष्णवी, कुमुदा, चंडिका, कृष्णा, माधवी, कन्यका, माया, नारायणी, ईशानी, शारदा आ अंबिका नाम से जानल गइली।
आगे चलके दुर्गा सप्तशती में जगदंबा के वचन के हवाला देके ई कथा विंध्यवासिनी देवी से जोड़ल गइल बा, जे मिर्जापुर में गंगा तीरे विंध्य पर्वत पर महालक्ष्मी विंध्यवासिनी, अष्टभुजा महासरस्वती आ काली-खोह में महाकाली के त्रिकोण रूप में बिराजेली। एह सिद्धपीठ के भक्त करोड़ों के संख्या में नंगे गोड़ पथरीली सीढ़ी चढ़ के दर्शन करेलें आ आपन दुख-सुख माई के चरणन में राख देलें। ई वीडियो देखला के बाद रउआ जन्माष्टमी पर माखन-मिश्री चढ़ावत समय ओह बहिन के भी याद राखब, जे कारागार गइली ताकि श्रीकृष्ण जी सकें आ गीता के ज्ञान संसार तक पहुँच सके। अंतस के खोज के एह साक्षी-भाव में आपन भीतर के डर आ त्याग के देखीं, आ कमेंट में जय माँ विंध्यवासिनी लिखीं।
0:00 अँधियारी रात में जनमल बेटी
2:22 देवकी वसुदेव के बियाह आ आकाशवाणी
5:02 छव बेर कोख उजड़ल कारागार में
7:50 बादल बिजली के बीच रूप बदलल
9:47 देवी के चौदह नाम आ अवतार
📖 भीतर का ब्रह्मांड (जीवंत पुस्तक): https://dhyanmarga.com/bhitar_ka_brah...
ई वीडियो के दृश्य आ आवाज तैयार करे में कुछ AI टूल्स के सहायता लिहल गइल बा।
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