Morning Ram Bhajan | Ram Ram Rat | राम राम रट | Tulsidas | Sanatan Gaan
Sanatan Gaan
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संत तुलसीदास का यह गूढ़ और भावप्रधान भजन “राम राम रट राम राम रट” राम-नाम की साधना, प्रेम और अनन्य आसक्ति का अत्यंत सूक्ष्म आध्यात्मिक चित्र प्रस्तुत करता है। “राम राम रट राम राम रट” भजन नाम-स्मरण को जीवन की एकमात्र गति, मति और अनुराग घोषित करता है।
यह दुर्लभ और गहन राम-नाम भजन साधक को जप, प्रेम और एकाग्रता के उच्चतम शिखर तक ले जाता है। यह भजन बताता है कि राम-नाम केवल जप नहीं, बल्कि आत्मा की प्यास है।
इस भजन में तुलसीदास जी कहते हैं कि राम-नाम का निरंतर जप मन और जिह्वा दोनों से होना चाहिए। जैसे पपीहा स्वाति नक्षत्र की वर्षा की प्रतीक्षा करता है, वैसे ही भक्त का मन केवल राम-नाम की सुधा का प्यासा बन जाता है। संसार के सभी साधन, फल, नदी और सागर निरर्थक हो जाते हैं, जब तक राम-नाम में प्रेम न जगे।
यह भजन पद शैली में रचित है, जिसमें रूपक, उपमा और गहन दार्शनिक संकेतों का सुंदर प्रयोग हुआ है।
This bhajan describes intense devotion to the name of Lord Rama. The poet compares the soul’s longing for Ram Naam to a bird waiting for sacred rain, showing that divine love alone quenches spiritual thirst.
इस भजन का श्रवण गहरे ध्यान, नाम-जप साधना और एकांत भक्ति के समय विशेष रूप से प्रभावशाली होता है।
पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ (Line-by-line Meaning)
राम राम रट राम राम रट, राम राम जप जीहा
राम नाम नव नेह मेह को, मन हठि होहि पपीहा
• हे मेरी जीभ! तू निरंतर केवल 'राम-राम' रट और 'राम-राम' का ही जाप कर। हे मेरे मन! तू राम-नाम रूपी नए (स्नेह से भरे) बादलों के लिए हठ (जिद्द) करके 'पपीहा' (चातक पक्षी) बन जा।
• O my tongue! Continuously chant and repeat the holy name of 'Rama, Rama'. O my mind! Stubbornly become the 'Papiha' (Chatak bird) for the fresh, love-filled clouds of Rama's name.
सब साधन फल फूल सरित सर, सागर सलिल निरासा
राम नाम रति स्वाति सुधा सुभ, सीकर प्रेम पियासा
• अन्य सभी आध्यात्मिक साधनाएं और उनके फल फूलों, नदियों, तालाबों और समुद्र के जल के समान हैं, जिनसे पपीहे को कोई आशा नहीं होती। उसे तो केवल राम-नाम के प्रेम रूपी स्वाति नक्षत्र की शुभ और अमृतमयी (सुधा) बूँदों (सीकर) की ही प्यास है।
• All other spiritual practices and their fruits are like the water of flowers, rivers, ponds, and oceans, which hold no hope for the Papiha bird. It thirsts only for the auspicious and nectar-like drops of the Swati star, which is the pure love for Rama's name.
गरजि तरजि पाषान बरषि पबि, प्रीति परख जिय जानै
अधिक अधिक अनुराग उमँग उर, पर परमिति पहचानै
• बादल चाहे कितनी भी गर्जना करे, डराए, ओले (पाषान) या बिजली (पबि) क्यों न गिराए, पपीहा इसे अपने प्रेम की परीक्षा ही मानता है। इन कष्टों को सहकर भी उसके हृदय में बादल के प्रति प्रेम और उमंग लगातार बढ़ती ही जाती है, और वह इसे ही सच्चे प्रेम की चरम सीमा (परमिति) मानता है।
• Even if the clouds roar, threaten, rain down hailstones or strike with lightning, the Papiha bird considers it a test of its devotion. Enduring all this, the affection and enthusiasm in its heart only grow more and more, recognizing this as the ultimate limit of true love.
राम नाम गति राम नाम मति, राम नाम अनुरागी
ह्वै गय हैं जे हो हिगे त्रिभुवन, तेइ गनियत बड़ भागी
• जिनका एकमात्र सहारा (गति) राम का नाम है, जिनकी बुद्धि राम-नाम में ही लगी है, और जो राम-नाम के ही सच्चे प्रेमी हैं; तीनों लोकों में ऐसे जो भी लोग अतीत में हुए हैं या भविष्य में होंगे, वे ही सबसे बड़े भाग्यशाली माने जाते हैं।
• Those whose only refuge is Rama's name, whose intellect is absorbed in Rama's name, and who are true lovers of Rama's name; whoever has been or will be like this in the three worlds, are considered the most fortunate ones.
ऐक अंग मग अगम गवन कर, बिलमु न छिन छिन छाहैँ
तुलसी हित अपनो अपनी दिसि, निरुपधि नेम निबाहैं
• तुलसीदास जी कहते हैं कि इस एकनिष्ठ प्रेम (एक अंग) के कठिन मार्ग पर निरंतर चलना चाहिए और पल भर के लिए भी किसी अन्य सांसारिक सहारे की छाँव में नहीं रुकना चाहिए। अपना सच्चा हित इसी में है कि अपनी ओर से इस निष्काम और छलरहित (निरुपधि) नियम को जीवन भर निभाया जाए।
• Tulsidas says that one must walk this difficult path of single-minded devotion without resting for even a moment in the shade of any other worldly shelter. One's true welfare lies in fulfilling this selfless, unconditional vow from one's own side till the very end.
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