निगाह-ए-करम | Nigaah-E-Karam | Hindi Urdu Christian Worship Song | Masihi Geet | Jesus Song
Gospel Songs Channel -2
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निगाह-ए-करम | Nigaah-E-Karam | Hindi Urdu Christian Worship Song | Masihi Geet | Jesus Song
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निगाह-ए-करम | Nigaah-E-Karam | Hindi Urdu Christian Worship Song | Masihi Geet | Jesus Song
जब इंसान टूट जाता है, तब ख़ुदावंद की रहमत उसे नई उम्मीद देती है। आइए, प्रार्थना और विश्वास के साथ उसकी मुहब्बत और फ़ज़ल की स्तुति करें।
Chorus
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 1
मैं भटकता रहा ज़ुल्मतों के सफ़र में, मेरी राहों में हर सू अंधेरा था साया।
तूने इक नूर बन कर जो मुझको पुकारा, मेरे दिल का हर इक ज़ोया-ओ-खोया मिला!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 2
मेरे हाथों से सरज़द हुए जो गुनाह, मेरी आँखों में शर्मिंदगी का असर था।
तूने अपने लहू से धो डाला ऐसे, जैसे दामन पे कोई कभी दाग़ न था!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 3
जब सताया मुझे इस जहाँ के ग़मों ने, जब अकेले में रोई मेरी जान-ए-ज़ार।
तूने चुपचाप आकर गले से लगाया, मेरे अश्कों को अपने हाथों से पोंछा खुदा!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 4
मैं तो मिट्टी का ज़र्रा था कमज़ोर सा, मेरी हस्ती ही क्या थी ज़माने की नज़र में।
तूने अपनी मोहब्बत की बख्शिश से मुझको, अर्श वालों की महफ़िल में रुतबा दिया!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 5
मेरे अपनों ने छोड़ा, ज़माने ने ठुकराया, हर तरफ़ से मुझे दर-ब-दर कर दिया।
तू ही मेरा मसीहा, मेरा मीत निकला, जिसने तन्हाई में भी हाथ मेरा न छोड़ा!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 6
सलीब-ए-मोहब्बत का मंज़र जो देखा, मेरे दिल से निकल कर ये आहें उठीं।
तेरे ज़ख़्मों ने बख्शा नया इक तफ़्कुर, तेरी उल्फ़त में मेरी शिफ़ा हो गई!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
Verse 7
अब तो साँसों की हर एक रफ़्तार में, बस तेरा ज़िक्र-ए-मुकद्दस बसा है खुदा।
जब तलक ये जहाँ और ये साँसें चलें, मेरा हर सजदा तेरे हुज़ूर में हो!
(Chorus)
तेरी निगाह-ए-करम मुझ गुनहगार पर, ऐ खुदावंद खुदा!
मेरी टूटी हुई रूह को थाम ले, मेरी बख्शिश की इल्तिजा!
✍️ Song Written By Brother Vipul Manik Shinde
प्रभु यीशु मसीह की शांति और कृपा आप सभी पर बनी रहे। 🙏✝️
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