जब अपनों के ख़िलाफ़ खड़ा होना पड़े | Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | Geeta Gyan 2
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
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जब अपनों के ख़िलाफ़ खड़ा होना पड़े | Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi | Geeta Gyan 2
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ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
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शंख बज चुके थे। फिर अर्जुन ने कहा, "मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कीजिए।" और जब देखा, तो सामने अपने ही थे।
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति । वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥ (गीता 1.29)
अगला सत्संग (गीता ज्ञान 3, श्लोक 31–47): • Видео
गीता ज्ञान 2 · Bhagwat Geeta Adhyay 1 in Hindi: अध्याय 1, श्लोक 20 से 30, महाभारत के संदर्भ में। हर श्लोक पहले संस्कृत में गाया गया, फिर उस पर बात।
जो अर्जुन गाण्डीव लेकर देवताओं से लड़ चुका था, उसकी हिम्मत अपनों के सामने क्यों टूटी? पूरे पहले अध्याय में श्रीकृष्ण सिर्फ़ एक वाक्य क्यों बोलते हैं, "पार्थ, इन्हें देख लो"? युद्ध होने वाला है, ये जानना और सामने खड़े चेहरों को देखना, इन दोनों में इतना फ़र्क क्यों है? और युद्ध से ठीक पहले युधिष्ठिर निहत्थे, पैदल, बड़ों के पास क्यों गए?
पिछला सत्संग (गीता ज्ञान 1, श्लोक 1–19): • गीता का पहला सवाल: धृतराष्ट्र का डर | Bhag...
पूरा पहला अध्याय, संस्कृत में गाया हुआ: • Bhagavad Gita Chapter 1 Sung in Sanskrit |...
शास्त्र से सीधे पूछिए, हर जवाब उस श्लोक के साथ जिस पर वो खड़ा है: https://occultguide.com/chat
अध्याय
0:00 गीता 1.20–1.22 (गायन)
1:00 "मेरा रथ दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कीजिए"
15:09 गीता 1.23–1.24 (गायन)
15:53 पाँच गाँव, और बड़ों की चुप्पी
26:52 गीता 1.25–1.26 (गायन)
27:32 "पार्थ, इन्हें देख लो": नाम चेहरे बन गए
39:47 गीता 1.27–1.28 (गायन)
40:31 करुणा जो साफ़ करे, मोह जो ढक दे
50:23 गीता 1.29–1.30 (गायन)
51:05 हाथ से फिसलता गाण्डीव · युधिष्ठिर का रास्ता · आज घर ले जाने के लिए
1:06:06 गीता 1.28 (फिर से)
1:06:29 शास्त्र से सीधे पूछिए
इस सत्संग के स्रोत (हर श्लोक गीता का अपना, जैसा लिखा है वैसा गाया गया; हर कथा महाभारत से)
गीता 1.20–1.30
गाण्डीव, अक्षय तरकश, वानर-ध्वज रथ — महाभारत, आदि पर्व
हनुमान का अर्जुन की ध्वजा पर बैठने का वचन — वन पर्व 153
अर्जुन का श्रीकृष्ण को सारथि चुनना — उद्योग पर्व 7
पाँच गाँव और सुलह के प्रयास — उद्योग पर्व
जुए की सभा, बड़ों की चुप्पी — सभा पर्व 89
भीष्म, द्रोण, शल्य से अर्जुन के रिश्ते — भीष्म पर्व 107; आदि पर्व 142; उद्योग पर्व 8
युधिष्ठिर का बड़ों से अनुमति लेने जाना — भीष्म पर्व 43
टीकाकार: मधुसूदन सरस्वती, श्रीधर स्वामी, नीलकण्ठ, रामानुज, संत ज्ञानेश्वर
आवाज़ और गायन AI से बने हैं।
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