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DSPMU Collage मे DJ और nagpuri गाना मे जाम के झूमर Dance ।

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DSPMU Collage मे DJ और nagpuri गाना मे जाम के झूमर Dance ।

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झारखंड भारत के सबसे आदिवासी बहुल राज्यों में से एक है। यहाँ 32 अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes) रहती हैं, जो राज्य की कुल आबादी का लगभग 26% हैं (2011 जनगणना के अनुसार करीब 86 लाख लोग)। ये जनजातियाँ मुख्य रूप से सरना धर्म (प्रकृति पूजा) मानती हैं और जंगल, कृषि तथा सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ी हैं। झारखंड की सबसे बड़ी और प्रमुख जनजातियाँ ये हैं:संथाल (Santhal/Santal) – सबसे बड़ी जनजाति। मुख्य रूप से संथाल परगना (दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा, जामताड़ा) में। भाषा – संथाली (ओल चिकी लिपि)। प्रसिद्ध विद्रोह – संथाल हुल (1855-56)। मुंडा (Munda) – दूसरी बड़ी जनजाति। रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा में। भाषा – मुंडारी। बिरसा मुंडा इसी समुदाय से थे। उराँव / कुड़ुख (Oraon) – तीसरी बड़ी। रांची, लोहरदगा, गुमला में। भाषा – कुड़ुख (द्रविड़ परिवार)। हो (Ho) – पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में। खड़िया (Kharia), भूमिज (Bhumij), खरवार, महली, लोहरा आदि। आदिम जनजातियाँ (PVTGs) – असुर, बिरहोर, बिरजिया, पहाड़िया (माल व सौरिया), कोरवा, परहइया आदि। ये बहुत छोटी संख्या में हैं और पारंपरिक शिकार-संग्रह जीवन शैली रखते हैं।गाने (लोकगीत)जनजातीय गीत ज्यादातर प्रकृति, फसल, प्रेम, विवाह, शिकार और त्योहारों से जुड़े होते हैं। ये सामूहिक रूप से गाए जाते हैं। प्रमुख गीत प्रकार:संथाल – सोहराय, बाहा (सरहुल), लगड़े, दसाय, वीर सेरेन (शिकार गीत), डाटा, पतवार। मुंडा – जादुर (सरहुल), गेना, करमा, जर्गा, जापी (शिकार), सोहराय। उराँव – सरहुल गीत, करमा गीत, हैरो (धान बुआई), वा (बसंत)। नागपुरी / सामान्य – झुमइर (झूमर), डोमकच, फगुआ, दोहरी, अधरतिया, भिनसरिया। गीत अक्सर मांदर, ढोल, नगाड़ा, बांसुरी, झांझ और शहनाई के साथ गाए जाते हैं।नाच (लोक नृत्य)नृत्य और गीत एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। ज्यादातर गोलाकार या पंक्ति में सामूहिक नृत्य होते हैं। प्रमुख नृत्य:नृत्य का नाम मुख्य जनजाति / क्षेत्र विशेषता / अवसर #छऊ (Chhau) #सरायकेला (भूमिज व अन्य) मुखौटा नृत्य, युनेस्को धरोहर, युद्ध व पौराणिक कथाएँ #झुमइर / झूमर संथाल, मुंडा, उराँव, नागपुरी फसल व खुशी का नृत्य, पुरुष-महिला दोनों करमा / करम उराँव, मुंडा, संथाल करम देवता की पूजा, युवा-युवतियाँ #सरहुल / बाहा सभी प्रमुख जनजातियाँ साल के फूलों के साथ वसंत उत्सव #पाइक ा #मुंडा, हो #तलवार-ढाल वाला योद्धा नृत्य #डोमकच #नागपुरी #विवाह का नृत्य #फिरकल #भूमिज #मार्शल (युद्ध) नृत्य #संथाली नृत्य #संथाल #समूह नृत्य, त्योहार व विवाह #मुंडारी नृत्य #मुंडाा #जादुर, गेना आदि #फगुआ #सामान्य #होली का नृत्य ये नृत्य सरहुल (वसंत), सोहराय (फसल), करम, मगहे और विवाह जैसे मौकों पर होते हैं। पुरुष अक्सर ढोल-मांदर बजाते हैं और महिलाएँ रंग-बिरंगे कपड़ों में नाचती हैं।झारखंड की जनजातीय संस्कृति प्रकृति, सामुदायिक एकता और मौखिक परंपराओं पर आधारित है।