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Al Biruni's India Chapter 18, 19 & 20

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Al Biruni's India Chapter 18, 19 & 20

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अध्याय 18: भारत का भूगोल, नदियाँ, समुद्र और प्रमुख शहरों की दूरियाँ भौगोलिक स्थिति व समुद्र की उत्पत्ति: भारत की प्राकृतिक बनावट, चारों ओर के पहाड़ और नदियाँ। अल-बिरूनी का भूगर्भीय विचार कि भारत की भूमि कभी समुद्र थी जो नदियों की लाई मिट्टी व गोल पत्थरों से भर गई। कन्नौज और प्रमुख मार्ग: मध्यदेश (कन्नौज) को केंद्र मानकर विभिन्न दिशाओं (प्रयाग, बनारस, पाटलिपुत्र, नेपाल, कश्मीर, मालवा, गुजरात, सिंध आदि) के नगरों की दूरियाँ। अद्भुत जीव व समुद्री विवरण: शरभ, गैंडा (कर्कदन), मगरमच्छ व जलीय जीवों का वर्णन; कश्मीर की प्राकृतिक सुरक्षा; दक्षिण के समुद्र तट, रामेश्वर, सेतुबंध, किष्किंधा, लक्षद्वीप-मालदीव (दीवा द्वीप) और भारत की मानसूनी वर्षा व्यवस्था। अध्याय 19: ग्रहों, राशियों और नक्षत्रों के नाम तथा खगोलीय मान्यताएँ वार और ग्रहों के नाम: सप्ताह के सातों दिनों के नामकरण, दिन और रात के घंटों (होरा) के स्वामी की गणना पद्धति और यूनानी प्रतीकों से तुलना। ग्रह व सूर्य-चंद्रमा के अर्थ: 7 ग्रहों के विभिन्न संस्कृत नाम, 12 सूर्यों की पौराणिक व खगोलीय अवधारणा (आदित्य, सविता, रवि) तथा चंद्रमा (सोम) का महत्व। 12 राशियाँ: मेष से मीन तक की 12 राशियों के नाम, वराहमिहिर द्वारा वर्णित उनकी आकृतियाँ और उनके विशिष्ट भारतीय/यूनानी पर्याय। अध्याय 20: ब्रह्मांड की अवधारणा (ब्रह्मा का अंडा) ब्रह्मांड की उत्पत्ति: जल से सृष्टि निर्माण, 'ब्रह्मा का अंडा' सिद्धांत और उसके दो भागों में बँटने की पौराणिक कथा तथा यूनानी दार्शनिकों (प्लेटो, एस्लेपियस) के विचारों से तुलना। खगोलीय गोलों की व्यवस्था: ब्रह्मगुप्त, पौलिश, वशिष्ठ, बलभद्र और आर्यभट्ट के अनुयायियों के अनुसार ब्रह्मांड का आकार, 8 खगोलीय गोले और प्रकाश की सीमा का दार्शनिक व वैज्ञानिक विश्लेषण। 00:00 - अध्याय 18: भारत का भूगोल, सीमाएं और नदियां 27:17 - अध्याय 19: ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के नाम 37:00 - अध्याय 20: ब्रह्मांड (ब्रह्मा का अंडा) की अवधारणा 43:57 - बलभद्र और आर्यभट्ट के अनुसार ब्रह्मांड का माप