अष्टावक्र गीता के अनुसार अपमान क्यों चुभता है
GYAN BHAKTI SAGAR
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अष्टावक्र गीता के अनुसार अपमान क्यों चुभता है
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अष्टावक्र गीता के अनुसार अपमान क्यों चुभता है?📌
अष्टावक्र गीता के अनुसार अपमान क्यों चुभता है?
जब कोई हमारे बारे में कुछ गलत या कठोर कहता है, तो शब्दों से ज्यादा चोट हमारी अहंकार से जुड़ी पहचान को लगती है। हम स्वयं को शरीर, नाम, प्रतिष्ठा और दूसरों की राय से जोड़ लेते हैं। इसलिए अपमान मन में पीड़ा, क्रोध और बेचैनी पैदा करता है।
अष्टावक्र गीता हमें साक्षी भाव की ओर संकेत करती है—जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने लगता है, तब बाहरी प्रशंसा और निंदा का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
इस वीडियो में जानिए कि अपमान क्यों चुभता है, अहंकार इसमें क्या भूमिका निभाता है और आत्मज्ञान के माध्यम से इस पीड़ा को कैसे समझा जा सकता है।
ज्ञान भक्ति सागर पर ऐसे ही आध्यात्मिक और अष्टावक्र गीता के गहरे ज्ञान के लिए
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