राजा परीक्षित ने ऋषि के गले में मृत साँप क्यों डाला? | कलियुग का प्रभाव
शास्त्री गरिमा शर्मा | भागवत कथा
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राजा परीक्षित ने ऋषि के गले में मृत साँप क्यों डाला? | कलियुग का प्रभाव
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राजा परीक्षित को कलियुग का श्राप क्यों मिला? | 7 दिन की भागवत कथा और मोक्ष | शास्त्री गरिमा शर्मा
युधिष्ठिर महाराज अपना राजपाट राजा परीक्षित को सौंपकर पांडवों के साथ स्वर्गारोहण के लिए प्रस्थान करते हैं। स्वर्गारोहण की यात्रा में द्रौपदी और एक-एक करके अन्य पांडव देह त्याग देते हैं, जबकि युधिष्ठिर अपने शरीर सहित स्वर्ग की ओर आगे बढ़ते हैं।
इधर राजा परीक्षित धीरे-धीरे बड़े होते हैं और राजकाज संभालते हैं। उनका विवाह होता है और उनके चार पुत्र जन्म लेते हैं, जिनमें ज्येष्ठ पुत्र जनमेजय होते हैं। राजा परीक्षित दिग्विजय के लिए निकलते हैं और जगह-जगह उन्हें पांडवों तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम और उनकी महिमा के प्रसंग सुनने को मिलते हैं।
इसी यात्रा में राजा परीक्षित गौ रूपी पृथ्वी और बैल रूपी धर्म को अत्यंत दुखी अवस्था में देखते हैं। धर्म के चार चरणों में से केवल एक चरण बचा था और पृथ्वी कलियुग के प्रभाव से व्यथित थी। राजा परीक्षित कलियुग को दंड देना चाहते हैं, लेकिन शरण में आने के कारण उसे अभयदान देते हैं और रहने के लिए कुछ स्थान प्रदान करते हैं।
लेकिन आगे चलकर कलियुग राजा परीक्षित के स्वर्ण मुकुट में प्रवेश कर उनके विवेक को प्रभावित करता है। वन में शिकार करते समय प्यास से व्याकुल राजा परीक्षित एक ऋषि के आश्रम में पहुँचते हैं। ऋषि के समाधि में होने के कारण उत्तर न मिलने पर वे उनके गले में मृत सर्प डाल देते हैं। इससे क्रोधित होकर ऋषि-पुत्र उन्हें सात दिन में मृत्यु का श्राप दे देता है।
श्राप का समाचार मिलने के बाद राजा परीक्षित राजपाट छोड़कर जीवन के अंतिम सात दिनों को भगवान की कथा सुनने में लगाने का निर्णय लेते हैं। तब शुकदेव जी महाराज उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हैं और सातवें दिन राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति का प्रसंग आता है। 🙏
🌸 जानिए राजा परीक्षित की पूरी कथा—कलियुग के प्रभाव से लेकर श्राप, भागवत श्रवण और मोक्ष तक।
🙏 राधे राधे | जय श्री कृष्ण | जय श्री राम
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