अन्य बुद्धों को चार आर्य सत्य का ज्ञान और पालि भाषा का गूढ़ रहस्य | Ep-35 | Bhante Paramanand
Nibbàna Supreme Happiness
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अन्य बुद्धों को चार आर्य सत्य का ज्ञान और पालि भाषा का गूढ़ रहस्य | Ep-35 | Bhante Paramanand
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नमो बुद्धाय 🙏
'बुद्ध कौन हैं' श्रृंखला के 35वें अध्याय (Episode 35) में आदरणीय भन्ते परमानंद जी तथागत बुद्ध के प्रतीत्यसमुत्पाद (पठिच्चसमुप्पाद) ज्ञान, चार आर्य सत्यों की सार्वभौमिकता और पालि भाषा के गूढ़ शब्दों के वास्तविक अर्थ को उजागर कर रहे हैं।
इस वीडियो में मुख्य चर्चा के बिंदु:
✨ प्रतीत्यसमुत्पाद के 12 अंग: अविद्या, संस्कार, विज्ञान, नाम-रूप, षडायतन, स्पर्श, वेदना, तृष्णा, उपादान, भव, जाति और जरामरण।
✨ तथागत बुद्ध ने किसी आधुनिक सूक्ष्मदर्शी से भी करोड़ों गुना अधिक गहराई से चित्त और प्रकृति के हेतु-फल नियमों को कैसे देखा?
✨ क्या केवल गौतम बुद्ध को ही यह ज्ञान मिला था? जानिए अतीत के अन्य सम्यक सम्बुद्धों और चार आर्य सत्यों का संबंध।
✨ 'अनित्य' (Anicca) का असली अर्थ: यह केवल परिवर्तन नहीं, बल्कि एक-दूसरे पर निर्भरता (हेतु-प्रत्यय) है।
✨ पालि भाषा (Pali Language) का महत्व और त्रिपिटक के मूल शब्दों के गहरे अर्थ को समझने की आवश्यकता।
✨ दो पंक्तियों की गाथा सुनकर प्राचीन काल में लोग कैसे अरहंत हो जाते थे?
यदि आप बौद्ध दर्शन की गहराई, मूल पालि वचनों और दुखों के मूल कारण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं, तो यह व्याख्यान अंत तक अवश्य सुनें।
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भवतु सब्ब मंगलं | सबका मंगल हो, सब सुखी हों! 🌸
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