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कुंडली के जिस भाव मे होंगे शनि वहाँ ये घटना 100% घटेगी

PT. NARMDESHWAR SHASTRI

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कुंडली के जिस भाव मे होंगे शनि वहाँ ये घटना 100% घटेगी

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PT. NARMDESHWAR SHASTRI
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कुंडली में शनि जिस भाव में बैठते हैं, वहाँ से आप छोड़ना चाहकर भी क्यों नहीं छूट पाते नौकरी, नगर, रिश्ता, पुश्तैनी काम। यह मोह नहीं है; शनि का जिम्मेदारी-बंधन है। बृहज्जातक के एक श्लोक से निकला यह सिद्धान्त अभी अपनी कुण्डली पर मिलाइए और जानिए शनि की राशि (स्थिर, चर, द्विस्वभाव) आपके बंधन का प्रकार कैसे तय करती है। वर्षों से "यह जगह मेरे लिये ठीक नहीं, छोड़ दूँगा" कहने वाले लोग वहीं क्यों हैं? मोह की शर्त है कि वस्तु से रस मिले; जहाँ रस न हो और बंधन फिर भी बना रहे, वहाँ कारण मोह नहीं हो सकता। काशी के पं. नर्मदेश्वर शास्त्री दशकों के अनुभव से इस विडियो में वह कारण खोलते हैं। वराहमिहिर के बृहज्जातक (अध्याय 2, श्लोक 1 "कालात्मा दिनकृत्, मनस्तुहिनगुः… दुःखं दिनेशात्मजः") में सातों ग्रहों का मूल स्वभाव एक पंक्ति में है: सूर्य आत्मा, चंद्र मन, मंगल बल, बुध वाणी, गुरु ज्ञान-सुख, शुक्र इच्छा, शनि दुःख। इसलिये शनि का बंधन सुख का बंधन नहीं हो सकता। शुक्र सुख से बाँधते हैं, चंद्र आदत से, राहु अतृप्ति से और शनि जिम्मेदारी से, जो चाहे बिना उठायी जाती है। शनि जिस भाव में बैठते हैं, पहले वहाँ से रस हटा देते हैं, पर जिम्मेदारी अन्त तक बनी रहती है; मन लगता नहीं, छोड़ पाते नहीं। फिर शनि की राशि से बंधन का प्रकार: स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में सबसे कठोर 20-25 वर्ष एक ही नौकरी; चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) में छोड़कर लौट आना त्याग अंतिम नहीं; द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) में दो-दो काम, मन कहीं नहीं। दशम, सप्तम, लग्न, चतुर्थ, अष्टम और द्वादश भाव के उदाहरण, और अन्त में दो उपाय लग्न-लग्नेश को बली करना और मंगल को बलवान करना इस चेतावनी के साथ कि यह दोष नहीं, प्रारब्ध है, जो कर्म पूरा करने से ही कटता है। समय-सूची: 00:00 – वर्षों से "छोड़ दूँगा", पर छूटता नहीं 01:01 – आज का सिद्धान्त 02:09 – शनि का बंधन शुक्र-चंद्र से अलग कैसे? 02:51 – बृहज्जातक का एक श्लोक 03:33 – शनि सुख से नहीं बाँधते 03:42 – शुक्र सुख से, चंद्र आदत से, राहु अतृप्ति से 04:21 – शनि बाँधते हैं जिम्मेदारी से 05:03 – भाव कर्तव्य बन जाता है 05:53 – वैराग्य भोग पर, भार पर नहीं 06:52 – दो लक्षण जिनसे शनि का बंधन पहचानिए 07:27 – दशम, चतुर्थ, सप्तम, द्वितीय 08:00 – उदाहरण: वृश्चिक लग्न, दशम में सिंह का शनि 08:22 – स्थिर राशि का शनि 09:45 – चर राशि का शनि: छोड़कर लौट आना 10:39 – द्विस्वभाव राशि का शनि 11:37 – दशम के शनि की पहचान 11:53 – सप्तम का शनि: विलंबित विवाह स्थायी क्यों? 12:47 – लग्न का शनि: कम उम्र में बड़ा दिखना 13:46 – चतुर्थ का शनि: माता-पिता से हट नहीं पाते 14:25 – अष्टम (ससुराल) और द्वादश 15:20 – उपाय 1: लग्न और लग्नेश को बली कीजिए 17:23 – उपाय 2: मंगल को बलवान कीजिए 17:53 – यह दोष नहीं, प्रारब्ध है 18:56 – कमेंट में बताइए 19:25 – समापन इस प्लेलिस्ट के सभी विडियो को देख लें बन जायेंगे ज्योतिषी -    • शुक्र क्यों सबसे ज्यादा प्रभावी हैं इस लग्...   ज्योतिष सीखने के लिए नया चैनल - Prachya Jyotish Vigyan https://www.facebook.com/pt.narmdeshw... Facebook Page -   / pt.narmdeshwarshashtri   Facebook Group https://www.facebook.com/groups/72522... Instagram Link - https://www.instagram.com/narmdeshwar... #ज्योतिष #वैदिकज्योतिष #Astrology #शनि #कुंडलीमेंशनि #शनिकाबंधन #PanditNarmdeshwarShastri PT.NARMDESHWAR SHASTRI Email-narmdeshwarshastri@gmail.com WhatsApp no.-09472889427 FOR INQUIRY -09931901712 www.narmdeshwarshastri.com ओके गूगल, कुण्डली में शनि जिस भाव में बैठता है उसका क्या फल होता है ओके गूगल, नौकरी छोड़ना चाहता हूँ पर छोड़ नहीं पा रहा, ज्योतिष में इसका कारण क्या है ओके गूगल, शनि दशम भाव में हो तो नौकरी पर क्या असर होता है ओके गूगल, शनि सातवें भाव में हो तो विवाह कैसा होता है ओके गूगल, स्थिर राशि में शनि हो तो क्या होता है Hey Google, Shani jis bhav me baitha ho uska fal kya hota hai Hey Google, naukri chhod nahi pa raha hu jyotish karan Hey Google, Shani 10th house me ho to kya hota hai Hindi Hey Google, Shani lagna me ho to kya hota hai Hey Google, Shani ka upay lagnesh ko bali kaise kare