Ram Bhajan | Hari Saman Data | हरि समान दाता | Nirgun Bhajan | Sant Malookdas | Sanatan Gaan
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हरि समान दाता कोउ नाहीं | संत मलूकदास भजन | राम भजन | Sanatan Gaan | राम नाम भजन | सबके दाता राम
संत मलूकदास की यह गहन वाणी “हरि समान दाता कोउ नाहीं” निर्गुण राम-भक्ति, पूर्ण शरणागति और ईश्वर की करुणा का अत्यंत सरल किंतु गूढ़ प्रतिपादन करती है। “हरि समान दाता कोउ नाहीं” भजन यह स्पष्ट करता है कि राम से बड़ा दाता कोई नहीं और वे सदा संतों के हृदय में निवास करते हैं।
संत मलूकदास जी की यह अमर वाणी राम को सर्वश्रेष्ठ दाता, पालनकर्ता और क्षमाशील प्रभु के रूप में स्थापित करती है। यह भजन विश्वास, संतोष और ईश्वर-आश्रय का शुद्ध संदेश देता है।
इस भजन में मलूकदास जी कहते हैं कि -
हरि समान दाता कोउ नाहीं। सदा बिराजैं संतनमाहीं॥१॥
ईश्वर के समान दान देने वाला कोई नहीं है। वे सदा संतों के हृदय में निवास करते हैं।
There is no giver equal to God. He eternally resides in the hearts of saints.
नाम बिसंभर बिस्व जिआवैं। साँझ बिहान रिजिक पहुँचावैं॥२॥
ईश्वर का नाम सम्पूर्ण संसार को जीवन देता है। वह शाम और सुबह सबको आजीविका पहुँचाता है।
God’s name sustains the entire universe. He provides sustenance morning and evening.
देइ अनेकन मुखपर ऐने। औगुन करै सोगुन करि मानैं॥३॥
वह अनेक लोगों को उनके सामने ही देता है। हमारे दोषों को भी गुण मानकर स्वीकार करता है।
He gives openly to countless beings. Even our faults are accepted by Him as virtues.
काहू भाँति अजार न देई। जाही को अपना कर लेई॥४॥
जिसे वह अपना बना लेता है, उसे किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देता।
One whom He accepts as His own is not made to suffer in any way.
घरी घरी देता दीदार। जन अपने का खिजमतगार॥५॥
वह अपने भक्तों को बार-बार दर्शन देता है। भक्त स्वयं को उसका सेवक मानते हैं।
He grants His vision again and again. His devotees remain forever in His service.
तीन लोक जाके औसाफ। जनका गुनह करै सब माफ॥६॥
तीनों लोक उसके गुणों का वर्णन करते हैं। वह अपने भक्तों के सभी पाप क्षमा कर देता है।
His praises are sung across the three worlds. He forgives all the sins of His devotees.
गरुवा ठाकुर है रघुराई। कहैं मलूक क्या करूँ बड़ाई॥७॥
रघुनाथ (ईश्वर) महान और भारी प्रताप वाले स्वामी हैं। मलूकदास कहते हैं—मैं उनकी महिमा कैसे बयान करूँ?
Raghurai (the Lord) is a mighty and exalted master. Says Malukdas—how can I possibly describe His greatness?
यह भजन पद शैली में रचित है, जिसमें निर्गुण भक्ति, दया और शरणागति का भाव प्रमुख है।
इस भजन का श्रवण चिंता, भय, अभाव या जीवन में असुरक्षा के समय विशेष रूप से मानसिक शांति और दृढ़ विश्वास प्रदान करता है।
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