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Ude Bai Ri Makhi उडे बाई री माखी Bijal khan lookgeet old song Rajasthani song marwari song

SODHA NOHDIYALA

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Ude Bai Ri Makhi उडे बाई री माखी Bijal khan lookgeet old song Rajasthani song marwari song

495 просмотров · 11 месяцев назад
SODHA NOHDIYALA
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'उड़े बाई री माखी' एक पारंपरिक राजस्थानी लोकगीत है, जिसकी कोई एक निश्चित कहानी नहीं है। यह एक विवाह गीत है जो पुरानी परंपराओं और भावनाओं को दर्शाता है, और इसकी कहानी अलग-अलग गायकों और उनके प्रस्तुतीकरण के साथ बदलती रहती है।  फिर भी, गीत का मूल भाव कुछ इस तरह है: प्रेमिका की भावनाएं: गीत में एक प्रेमिका का अपने प्रेमी के प्रति प्रेम व्यक्त किया गया है। वह एक मक्खी (माखी) को देखती है और उससे अपने प्रेमी के पास जाकर उसका संदेश देने का आग्रह करती है। संदेश भेजने का प्रयास: गाने में, प्रेमिका मक्खी से शिकायत करती है कि वह प्रेमी के पास क्यों बैठी है और उसे परेशान कर रही है। वह मक्खी से कहती है कि वह उड़कर उसके प्रेमी के पास जाए और उसे बताए कि वह उसका इंतज़ार कर रही है। विरह का दर्द: यह गीत प्रेमिका के विरह का दर्द दिखाता है, जो अपने प्रेमी से दूर है। वह मक्खी के माध्यम से अपनी भावनाओं को प्रकट करने का प्रयास करती है।  कुल मिलाकर, 'उड़े बाई री माखी' एक ऐसा गीत है, जो प्रेम और विरह की भावनाओं को दर्शाता है। इसे सदियों से राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में गाया जाता रहा है और यह एक पारंपरिक लोकगीत है।