उलार सूर्य मन्दिर जहाँ छठ पूजा में जुटते है 15 लाख से अधित श्रद्धालु, यहाँ ये बीमारी ठीक हो जाता है
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उलार सूर्य मन्दिर जहाँ छठ पूजा में जुटते है 15 लाख से अधित श्रद्धालु, यहाँ ये बीमारी ठीक हो जाता है
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उलार सूर्य मन्दिर जहाँ छठ पूजा में जुटते है 15 लाख से अधित श्रद्धालु, यहाँ ये बीमारी ठीक हो जाता है
उलार सूर्य मन्दिर
यह मन्दिर पटना से लगभग 50 किलोमीटर दूर है
यहाँ
इस वीडियो को पूरा देखिये
क्योंकि इस वीडियो में यहाँ के महंत जी ने जो बाते बताई है ओ सायद बहुत लोग नहीं जानते है
NOTE - कुस्ट रोग यहाँ पर आने से सही हो जाता है जो की यहाँ के ग्रामीणों ने बताया
इस बार यहाँ का नजारा आपको बहुत ही अलग दिखने वाला हैक्योंकि यहाँ बहुत कुछ बन गया है
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पटना से तकरीबन 50 किलोमीटर की दूरी पर है उलार गांव, वैसे इस गांव का नाम पहले उलार्क था मगर अब उलार के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि भगवान कृष्ण के वंशज सांब को जब कुष्ठ व्याधि हुई उससे मुक्ति के लिए उन्होंने देश के विभिन्न 12 जगहों पर भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था और भगवान सूर्य की आराधना की थी। ऐसा कहा जाता है कि तब जाकर सांब को कुष्ठ से मुक्ति मिली थी। बताते हैं कि मुगल काल में विदेशी आक्रमणकारियों ने देश के कई प्रमुख मंदिरों के साथ उलार मंदिर को भी काफी क्षति पहुंचाई थी बाद में संत अलबेला बाबा करीब1852 से1854 के बीच उलार गांव आए और जन सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। मंदिर के आस पास खुदाई के दौरान यहां विभिन्न देवी देवताओं की दर्जनों विखंडित दुर्लभ मूर्तियां मिली।
लोगों का यह भी मानना है कि जिन महिलाओं के आंचल पर छठ के अवसर पे नेटूवा नाच दे उस औरत की हर मन्नत पूरी हो जाती है।
यानी कि उलार सूर्य मंदिर की महिमा अपरंपार है यहां छठ व्रती अपने मन में जो भी आस लेकर आस्था और विश्वास के साथ छठ व्रत करती है भगवान भास्कर और छठी मैया उनकी सभी मनोवांछित मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
उलार गांव जाने के क्रम में नौबतपुर एवं विक्रम मैं अनगिनत जगहों पर सूर्य देव की मूर्ति स्थापित किए गए थे, हजारों की संख्या में श्रद्धालु विभिन्न पंडाल में अटे पड़े थे, रास्ते में कई लोगों से रास्ता पूछते पूछते आखिरकार हम लोग उलार गांव पहुंच ही गए, वहां की भीड़ को देखकर हम लोग काफी हतप्रभ हो गए,
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वहां 500000 लोगों की भीड़ इकट्ठा थी, पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय लोगों की मदद से वहां भीड़ को कंट्रोल किया जा रहा था, एक तरफ से श्रद्धालु आ रहे थे तो दूसरी तरफ श्रद्धालु जा रहे थे लोगों का कहना था की संध्या 3:00 बजे से ही श्रद्धालु और अर्घ्य देना प्रारंभ कर चुके थे और यह सिलसिला संध्या 5:30 बजे तक चलता रहा। लोगों की इतनी श्रद्धा है की कई श्रद्धालु अपने खर्चे पर पूरे परिवार के साथ वहां टेंट लगाकर पिछले 2 दिनों से वहां रह रहे थे ताकि उन्हें व्रत करने में कोई कठिनाई ना हो और सबसे बड़ी बात है कि छठ की पूरी तैयारी घाट के किनारे ही कर रहे हैं , ठेकुआ भी घाट के किनारे ही बना रहे हैं।
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