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श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🌼| आज की विशेष आरती | भक्ति में है शक्ति | हर हर महादेव🙏

पहाड़ी_महिला

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"महादेव" मुख्य रूप से भगवान शिव का एक नाम है, जिसका अर्थ है "महान देव"। यह नाम उन्हें सभी देवताओं में सबसे महान माना जाने के कारण दिया गया है। धार्मिक संदर्भ भगवान शिव: महादेव हिंदू धर्म में भगवान शिव का एक प्रमुख नाम है। उन्हें आदि-देव माना जाता है, जो सृष्टि, पालन और संहार के चक्र से जुड़े हैं। परमेश्वर: यह नाम अक्सर परमेश्वर को संदर्भित करता है, जो ब्रह्मांड के स्वामी हैं। विविध नाम: शिव को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे शंकर, भोलेनाथ, महेश्वर आदि। महादेव को तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, शंख से जल, लाल रंग के फूल, हल्दी और कुमकुम जैसी चीजें नहीं चढ़ानी चाहिए। इसके अलावा, टूटे हुए बेलपत्र, टूटा हुआ चावल और नारियल का पानी भी नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह भगवान शिव को अप्रिय माने जाते हैं। क्या नहीं चढ़ाना चाहिए तुलसी के पत्ते: तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है, इसलिए शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते हैं। केतकी का फूल: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने इस फूल को श्राप दिया था, इसलिए इसे नहीं चढ़ाया जाता है। शंख से जल: शिवजी ने शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए शंख से जलाभिषेक वर्जित है। लाल रंग के फूल: लाल रंग को उग्रता का प्रतीक माना जाता है, जबकि शिवजी को शांत माना गया है। हल्दी और कुमकुम: ये भगवान शिव के वैरागी रूप से मेल नहीं खाते, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी और कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए। केले का फल: पौराणिक मान्यता के अनुसार, केले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के रौद्र रूप और ब्राह्मण के श्राप के कारण हुई थी। नारियल का पानी: नारियल को लक्ष्मी जी का स्वरूप माना जाता है और शिवजी को लक्ष्मी जी का मां स्वरूप माना गया है, इसलिए नारियल के पानी से अभिषेक नहीं किया जाता है। टूटे हुए बेलपत्र: शिवलिंग पर हमेशा ताजे और कटे-फटे या कीड़े लगे हुए बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए। टूटे हुए चावल: टूटे हुए चावल 'अक्षत' की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए इन्हें अर्पित करने से बचें।