अध्याय -2 | रास पंचाध्यायी अध्याय | श्री कृष्ण का अंतर्धान होना और गोपियों का विरह विलाप
Radha Krishna Premkatha
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अध्याय -2 | रास पंचाध्यायी अध्याय | श्री कृष्ण का अंतर्धान होना और गोपियों का विरह विलाप
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रास पंचाध्यायी | श्रीमद्भागवद महापुराण | दशम स्कन्ध | तीसवा अध्याय | श्लोक 1 से 45
अचानक! कहाँ गायब हो गए श्री कृष्ण? जब ब्रज सुंदरियों को अपने प्रियतम नहीं मिले, तब उनकी जो दशा हुई, उसे जान कर आपकी भी आँखें भर आएंगी! आख़िर लताओं- पताओं, पेड़-पौधों से गोपियों ने क्या पूछा? जानिए इस अनोखी लीला को...
इस वीडियो में हम श्रीमद्भागवत महापुराण के रास पंचाध्यायी के दूसरे अध्याय का वर्णन करेंगे। जब श्री कृष्ण अचानक अंतर्धान हो जाते हैं, तो वृंदावन की गोपियों और ब्रज सुंदरियों की व्याकुल दशा कैसी हो जाती है, इसका मनोहारी चित्रण किया गया है। गोपियाँ पेड़-पौधों, लताओं और प्रकृति से अपने प्रियतम श्री कृष्ण का पता पूछती हैं और उनके विरह में पागल होकर उन्हीं की लीलाओं का अनुकरण करने लगती हैं। यह भक्ति और प्रेम का परम स्वरूप है।
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