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देश बचाने का जिम्मा सिर्फ पंच-सरपंचों पर?

INDIA-AAJKAL | इंडिया-आजकल

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देश बचाने का जिम्मा सिर्फ पंच-सरपंचों पर?

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अपने ही 2003 के एक फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट दोबारा गौर कर रहा है और इस मामले को तीन जजों की बड़ी बेंच के पास भेज रहा है। फैसला यह था कि पंचायत में निर्वाचित पंच-सरपंच को तीसरा बच्चा होने पर उनके पद से हटा दिया जाए, या दो से ज्यादा बच्चों के माता-पिता को पंचायत चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए। जी हां, विधानसभा और संसद के सदस्यों ने ऐसे कानून बनाए थे, लेकिन उन्होंने कभी अपने सदस्यों पर ऐसे नियम लागू नहीं किए। लालू यादव के तो एक के बाद एक बच्चे होने का किस्सा सबको याद ही है। लेकिन लालू और राबड़ी, दोनों न जाने कितने सदनों के कितनी बार सदस्य रहे। तो यह सिलसिला सांसदों और विधायकों ने पंच-सरपंचों पर ही लागू किया था। अब इस पर दोबारा गौर क्यों किया जा रहा है? क्या अब दो से कम बच्चे अच्छे नहीं हैं? क्या अब दो या उससे अधिक बच्चे बेहतर हैं? क्या है मामला? इस पर तृप्ति सोनी ने सुनील कुमार से कुछ सवाल किए। #IndiaDemographics #IndianPolitics #LawNews #SupremeCourtJudgment #PanchayatElection #twochildpolicy #twochildlaw #supremecourt #supremecourtofIndia #supremecourtjudgment #sarpanch #sarpanchdisqualification #thirdchild #populationcontrol #fertilityrate #lawprepjudi­ciary