अजोला उगाने का सबसे आसान तरीका बता रहे हैं विशेषज्ञ Azolla Cultivation
Dr Yogesh Arya
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अजोला उगाने का सबसे आसान तरीका बता रहे हैं विशेषज्ञ Azolla Cultivation
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Dr Yogesh Arya
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अजोला उत्पादन की विधि:-
अजोला की उत्पादन लागत प्रति एक किलो पर एक रुपये से कम आती है इसलिए किसानो व पशुपालको के बीच में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और यही कारण है कि दक्षिण से शुरू हुयी अजोला की खेती का कारवाँ अब पुरे भारत में फैलता जा रहा है अजोला की खेती किसान अपने आस पास खाली पड़ी जमीनों के अलावा अपने घरो की छतो पर भी इसका उत्पादन सरलता एवं सुगमता से कर सकते है|
भूमि का चयन-
पशुपालक अपने आस पास अनुपयोगी पड़ी भूमि में अजोला का उत्पादन कर सकता है भूमि का चयन करते वक्त यह ध्यान रखना चाहिए कि क्यारिया बनानी है वहा की भूमि का स्तर ऊँचा होना चाहिए ताकि वर्षा या अन्य किसी प्रकार का गन्दा जल क्यारियों में ना आ सके अजोला की क्यारिया जल स्रोत के आस पास होने चाहिए जिस से क्यारियों में सरलता से पानी दिया जा सके|
क्यारिया बनाने की पद्दति-
3 फीट चोडी 10 फीट लम्बी व 1 फीट गहरी आकार की कच्ची क्यारिया तैयार करके उस पर पॉलिथीन शीट को एक समान इस तरह से फेलाया जाये जिस से की क्यारी की परिधि अनुसार आयताकार आकार के किनारे पूरी तरह से ढक जाये इन क्यारियों में दस किलो छन्नी हुयी मिटटी व दो किलोग्राम गोबर खाद को मिलकर प्रति क्यारी में बिछा देना चाहिए और इन क्यारियों में पानी भर देना चाहिए सीमेंट की टंकी में भी अजोला उगाया जा सकता है उस टंकी में प्लास्टिक शीत बिछाने की आवश्यकता नही रहती सिर्फ छाया करने के लिए शेड नेट की जरुरत पड़ती है| आजकल बाजार में 12 ल. 6 चो. 1 ग. फीट की उच्च घनत्व पालीएथीलीन अजोला उत्पादन बेड भी उपलब्ध है|
अजोला का क्यारियों में स्थानांतरण-
0.5 -1 किलो शुद्ध अजोला कल्चर पानी पर एक समान फेला देना चाहिए| अजोला बीज फेलाने के तुरंत बाद अजोला के पोधो को सीधा करने के लिए अजोला पर ताजा पानी का छिडकाव करना चाहिए| एक सप्ताह के अन्दर अजोला पूरी क्यारी में फेल जाता है एव एक मोटी चादर जैसी बन जाती है| अजोला की तेज वृद्धि तथा 200 ग्राम प्रति वर्गमीटर देनिक पैदावार के लीये 5 दिनों में एक बार लगभग 1 किलो गोबर और 20 ग्राम सिंगल सुपर फोस्फेट मिलाया जाना चाहिए अजोला बहुत तेजी से बढ़ता है और 10-15 दिन के अन्तराल में पुरे गड्डे को ढक लेता है|
अजोला उत्पादन के दोरान बरती जाने वाली सावधानिया-
अजोला की तेज बढवार और उत्पादन के लिए इससे प्रतिदिन उपयोग हेतु लगभग 200 ग्राम प्रतिवर्ग मीटर की दर से बाहर निकाला जाना आवश्यक है|
अजोला तेयार करने के लिए अधिकतम 30 डिग्री तापमान उपयुक माना जाता है तथा इसे तेयार करने वाला स्थान छायादार होना चाहिए|
समय समय पर गड़े में गोबर व सिंगल सुपर फोस्फेट डालते रहे जिससे अजोला फ़र्न तीव्र गति से विकशित होता रहे|
प्रतिमाह एक बार अजोला तेयार करने वाले गड्डे या टंकी की लगभग 5 किलो मिटटी को ताजा मिटटी से बदले जिससे नत्रजन की अधिकता या अन्य खनिजो की कमी होने से बचाया जा सके।
क्यारिया बनाने की पद्दति-
3 फीट चोडी 10 फीट लम्बी व 1 फीट गहरी आकार की कच्ची क्यारिया तैयार करके उस पर पॉलिथीन शीट को एक समान इस तरह से फेलाया जाये जिस से की क्यारी की परिधि अनुसार आयताकार आकार के किनारे पूरी तरह से ढक जाये इन क्यारियों में दस किलो छन्नी हुयी मिटटी व दो किलोग्राम गोबर खाद को मिलकर प्रति क्यारी में बिछा देना चाहिए और इन क्यारियों में पानी भर देना चाहिए सीमेंट की टंकी में भी अजोला उगाया जा सकता है उस टंकी में प्लास्टिक शीत बिछाने की आवश्यकता नही रहती सिर्फ छाया करने के लिए शेड नेट की जरुरत पड़ती है| आजकल बाजार में 12 ल. 6 चो. 1 ग. फीट की उच्च घनत्व पालीएथीलीन अजोला उत्पादन बेड भी उपलब्ध है|
अजोला का क्यारियों में स्थानांतरण-
0.5 -1 किलो शुद्ध अजोला कल्चर पानी पर एक समान फेला देना चाहिए| अजोला बीज फेलाने के तुरंत बाद अजोला के पोधो को सीधा करने के लिए अजोला पर ताजा पानी का छिडकाव करना चाहिए| एक सप्ताह के अन्दर अजोला पूरी क्यारी में फेल जाता है एव एक मोटी चादर जैसी बन जाती है| अजोला की तेज वृद्धि तथा 200 ग्राम प्रति वर्गमीटर देनिक पैदावार के लीये 5 दिनों में एक बार लगभग 1 किलो गोबर और 20 ग्राम सिंगल सुपर फोस्फेट मिलाया जाना चाहिए अजोला बहुत तेजी से बढ़ता है और 10-15 दिन के अन्तराल में पुरे गड्डे को ढक लेता है|
अजोला उत्पादन के दोरान बरती जाने वाली सावधानिया-
अजोला की तेज बढवार और उत्पादन के लिए इससे प्रतिदिन उपयोग हेतु लगभग 200 ग्राम प्रतिवर्ग मीटर की दर से बाहर निकाला जाना आवश्यक है|
अजोला तेयार करने के लिए अधिकतम 30 डिग्री तापमान उपयुक माना जाता है तथा इसे तेयार करने वाला स्थान छायादार होना चाहिए|
समय समय पर गड़े में गोबर व सिंगल सुपर फोस्फेट डालते रहे जिससे अजोला फ़र्न तीव्र गति से विकशित होता रहे|
प्रतिमाह एक बार अजोला तेयार करने वाले गड्डे या टंकी की लगभग 5 किलो मिटटी को ताजा मिटटी से बदले जिससे नत्रजन की अधिकता या अन्य खनिजो की कमी होने से बचाया जा सके|
अजोला तेयार करने की टंकी के पानी के pH का मान समय समय पर परिक्षण करते रहे इसका pH मान 5.5-7.0 के मध्य होना उत्तम रहता है|
प्रति दस दिनों के अन्तराल से एक बात अजोला तेयार करने की टंकी या गड्डे से 25-30% पानी ताजे पानी से बदल देना चाहिए जिससे नाइट्रोजन की अधिकता से बचाया जा सके|
प्रत्येक 3 महीनो के अन्तराल से एक बार क्यारी को साफ किया जाना चाहिए पानी तथा मिटटी को बदला जाना चाहिये एवं नये अजोला बीज का उपयोग किया जाना चाहिए|
अजोला को क्यारी से निकालने के लिए छलनी का उपयोग करना चाहिए व उसी छलनी में साफ पानी से धो लेना चाहिए ताकि छोटे छोटे पौधे जो की छलनी में चिपके रहते है उनको वापस क्यारी में डाला जा सके|
प्रकाश की तीव्रता कम करने के लिए छाया करने वाली जाली का उपयोग करना चाहिए|
अजोला की क्यारी में बायोमास अधिक मात्रा में एकत्र होने से रोकने के लिए अजोला को प्रतिदिन क्यारी से हटाना चाहिए|