ब्रह्मसूत्र(234)॰1.4.1.1॰"शरीररुपकविन्यस्तगृहीते:" अव्यक्त शब्द से रथरूपक विन्यस्त शरीर का ही ग्रहण
Swami Bodhatmananda Saraswati
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ब्रह्मसूत्र(234)॰1.4.1.1॰"शरीररुपकविन्यस्तगृहीते:" अव्यक्त शब्द से रथरूपक विन्यस्त शरीर का ही ग्रहण
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