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ऋषियों के शोध को कोई चुनौती नहीं दे सकता | माण्डूक्य उपनिषद् मन्त्र 3

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ऋषियों के शोध को कोई चुनौती नहीं दे सकता | माण्डूक्य उपनिषद् मन्त्र 3

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जागरितस्थानो बहिष्प्रज्ञ: सप्ताङ्ग एकोनविंशतिमुख: स्थूलभुग्वैश्वानर: प्रथम: पाद:॥ जागरित-स्थानः बहिः-प्रज्ञः सप्त-अङ्गः एकोन-विंशति-मुखः स्थूल-भुक् वैश्वानरः प्रथमः पादः mail info@dineshji.com Website https://dineshji.com "🔴 Meditation goes Live daily at 3:58 AM IST | 6:30 PM ET (US) | 3:30 PM PT (US) | 8:30 AM Sydney" Line 2: "Missed it live? This replay is up immediately — no waiting." अगर आप 60 दिन की ब्रह्म मुहूर्त ध्यान के मॉनिटरिंग कार्यक्रम में भाग लेना चाहते हैं तो इस पुस्तक को प्राप्त करें जिससे आपका स्वतः उसमे पंजीकरण हो जायेगा। पुस्तक प्राप्त करते ही आपका enrolment अपने आप Monitoring कार्यक्रम में हो जाएगा और आगे के निर्देश प्राप्त होंगें। https://dineshji.com/product-hard-cop... Email info@dineshji.com Website https://dineshji.com सूर्योदय से पूर्व का समय ब्रह्म मुहूर्त के नाम से जाना जाता है। यह वह अद्भुत चमत्कारिक पल होते हैं जिनके सदुपयोग के द्वारा मनुष्य अपने भीतर बहुत कुछ विकसित और बदल सकता है। इसे अमृत बेला यूँ ही नहीं कहा जाता, इन क्षणों में प्रकृति शान्त और जागृत होती है। सूक्ष्म ऋषि सत्ताएं ज्ञानियों के अनुसार इस समय एक विशेष प्रवाह प्रसारित करती हैं। वह प्रवाह अनेकों स्तरों पर हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करता है। इतना ही नहीं और भी बहुत कुछ। ध्यान एक अवस्था है जिसकी तैयारी मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन आचरण से हो कर ही जाती है। कहते हैं न की जो भाव जीव के भीतर उसके अंतिम क्षण में होता है वही उसके अगले जन्म का आधार बनता है। यहाँ एक भाव समझने योग्य महत्वपूर्ण है की वह अंतिम क्षण का भाव भी सम्पूर्ण जीवन की तैयारी का ही परिणाम होता है , ठीक उसी प्रकार ध्यान भी एक लम्बी तैयारी की फलश्रुति है। श्रीमद भगवद गीता से अधिक सुंदर स्वरूप में यह बोध और अन्य कहाँ प्राप्त होता है। इस सम्पूर्ण विवेचना को आप एक अध्यापक की कक्षा जान कर ही पढ़ना। #gitaonline