UP's heritage: Curzon Bridge Ganga Museum | कर्जन ब्रिज गंगा म्यूजियम | Lord Curzon | Prayagraj
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#CurzonBridge #GangaMuseum #Prayagraj
लार्ड कर्जन ... इतिहास की किताबों में आपने ये नाम कई बार पढ़ा होगा ? परीक्षाओं में इनसे जुड़े कई सवालों का जवाब भी लिखा होगा और 39 साल की उम्र में भारत के सबसे कम उम्र के वायसराय बने कर्ज़न की इस उपलब्धि के बारे में भी हो सकता है आप सब जानते होंगे। पर लार्ड कर्जन के प्रयागराज से जुड़े उस नाते के बारे में आप में से शायद ज़्यादा लोग न जानते हों जिसकी वजह से आज इस वीडियो की शुरुआत हम कर्जन के नाम से कर रहे हैं। आप अगर इलाहबाद यानी प्रयागराज से हैं या वहां रहे हैं तो बेशक आप इसे थोड़ा रिलेटे कर होंगे पर फिर भी आज जो हम आपको इस वीडियो में बता रहे हैं वो बिल्कुल ही नया है। चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो ज़रूर करें और वीडियोज की लेटेस्ट अपडेट के लिए बेल आइकॉन को दाबना न भूलियेगा।
ये है प्रयागराज...जब आप कभी फैजाबाद या लखनऊ से प्रयागराज आते हैं तो फाफामऊ के पास आपको गंगा जी मिलती हैं। गंगा नदी को पार करने के लिए तीन रास्ते हैं, एक है रेलवे ट्रैक, दूसरा है फाफामऊ पुल और यहीं पर एक बड़ा ही पुराना सा पुल भी मौजूद है जिसे कर्जन ब्रिज के नाम से जाना जाता है। इस ब्रिज की ख़ासियत ये है कि ये करीब दो किलोमीटर लंबा है और इसमें नीचे ट्रेन रेलवे ट्रैक तो ऊपर सड़क मार्ग बना हुआ है।
क़रीब 117 साल पहले जब लार्ड कर्जन भारत के वायसराय थे तो 1901 में सड़क व रेल यातायात के लिए इस पुल का प्रस्ताव पास हुआ। जनवरी 1902 में निर्माण शुरू हुआ और पुल में 61 मीटर लंबे गर्डर और 15 पिलर का प्रयोग करके इस पुल को 15 जून सन् 1905 में तैयार कर लिया गया। बाद में नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद इसका नाम मोतीलाल नेहरु ब्रिज रखा गया और क़रीब 100 साल तक अपनी सेवाएं देने वाला ये रेलवे ट्रैक 1998 में बंद हो गया। बताया गया कि रेल और सड़क यातायात के लिए ये पुल अब सुरक्षित नहीं है। इसके बाद प्रयागराज को लखनऊ, प्रतापगढ़ और फैजाबाद से जोड़ने के लिए एक दूसरा रेलवे ट्रैक और चंद्रशेखर आजाद सेतु बनाया गया जिसे फाफामऊ पुल भी कहा जाता है। आज यही दोनों पुल प्रयागराज को इन शहरों से जोड़ते हैं।
1998 के बाद से ही कर्जन ब्रिज को गिराए जाने की चर्चा होती रही है। पांच साल पहले रेलवे इस ब्रिज के नीलामी की योजना बनाई थी लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध और इसकी ऐतिहासिकता को देखते इस पर कोई करवाई नहीं हो सकी। आज ये कर्जन ब्रिज गंगा दर्शन, मॉर्निंग वॉक और सेल्फी का जबर्दस्त अड्डा है और यहां के लोगों की भाषा में कहें तो यहां बकैती भी खूब होती है।
अब इसी कर्जन ब्रिज को लेकर एक बड़ी अच्छी खबर ये आई है कि संगम नगरी की इस 117 साल पुरानी धरोहर को संजोने के लिए इस ब्रिज पर म्यूजियम बनाने की तैयारी चल रही है। कर्जन ब्रिज पर म्यूजियम बनाने के लिए यहां के कमिश्नर ने अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है और अगर ये कार्ययोजना सफल रही तो प्रयागराज के कर्जन ब्रिज पर बनने जा रहा ये म्यूजियम देश में अपने तरह का गंगा नदी पर एक विशेष म्यूजियम होगा। इस म्यूजियम के बनने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और ऐसा होगा तो फाफामऊ क्षेत्र के लोगों को इससे रोज़गार मिलने की भी संभावना रहेगी।
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